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मेरी सखी

कभी चंचल है, कभी है गंभीर

कभी हवा सी है, कभी जैसे नीर 

कभी मोती जैसे खानेके वो

कभी चन्दन जैसे महके वो

कभी बदलो की ओट से

चिड़िया बनके चहके वो 

कभी नदी की धरा बनके 

मेरे बदन पे है वो बही

मैं उसका सखा, वो मेरी सखी...

 

कभी बड़ बड़ बोले, कभी रहे वो मौन

कभी मुझसे पूछे, मैं उसका कौन

कभी प्रेम भरे वो रिश्ते बनाए

कभी मेहंदी से मेरा नाम सजाये

कभी क्रोध से मुझपे बरसे वो

कभी प्रेम का पानी वो बरसाए

कभी चुम्बक बनके खींचे मुझको

उसकी ये प्यारी बाते सभी

मैं उसका सखा, वो मेरी सखी…

 

कभी रूठे वो, कभी मुझे मनाये

कभी लिपटे मुझसे, कभी यूँ ही लजाये

कभी गहनों से श्रींगार करे

कभी मेरे नाम का सिन्दूर भरे

कभी प्राण ही ले ले मेरे वो

कभी मेरे लिए वो स्वयं मरे

कभी झूठ मूठ की बातें बनाकर

जोर जोर से है मुझपे हंसी

मैं उसका सखा, वो मेरी सखी...

 

 

 

 

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Comment

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Comment by shahrukh siddiqui on August 13, 2012 at 1:10am

ati sundar ranveer ji aapne to prem me sarabor kar diya, badhaai 

Comment by Ranveer Pratap Singh on August 12, 2012 at 12:13am

@rajesh kumari  dhanywaad rajesh ji...

Comment by Ranveer Pratap Singh on August 12, 2012 at 12:12am

@ Rekha Joshi aapka bahut bahut dhanywaad Rekha ji jo aap har baar mujhe protsaahit karti hain... dhanywaad

 

Comment by Rekha Joshi on August 11, 2012 at 1:47pm

कभी प्रेम भरे वो रिश्ते बनाए

कभी मेहंदी से मेरा नाम सजाये

कभी क्रोध से मुझपे बरसे वो

कभी प्रेम का पानी वो बरसाए

कभी चुम्बक बनके खींचे मुझको

उसकी ये प्यारी बाते सभी

मैं उसका सखा, वो मेरी सखी…

अति सुंदर भाव आदरनीय रणवीर जी ,बहुत बहुत बधाई 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 11, 2012 at 9:49am

बहुत सुन्दर अहसास  प्रेम रस में पगी सुन्दर रचना हेतु बधाई 

Comment by Ranveer Pratap Singh on August 10, 2012 at 11:12pm

 Dr.Prachi Singh ji dhanywaad...

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 10, 2012 at 8:53pm
बहुत सुन्दर मधुर प्रेम मय रचना..हार्दिक बधाई इन कोमल भावों की अभिव्यक्ति पर.

कृपया ध्यान दे...

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