For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

“मीत मन से मन मिला तू और स्वर से स्वर मिला,”
कर लिया यह कर्म जिस ने उस को ही ईश्वर मिला.
कांच   की  कारीगरी  में  जो   निपुण  थे  साथियों,
आजकल उन के ही  हाथों  में   हमें   पत्थर  मिला.
पेट भर  रोटी  मिली   जब   भूखे  बच्चों को  हुज़ूर,
सब कठिन प्रश्नों का उन को इक सरल उत्तर मिला.
चापलूसी  की   कला  में  जो  है  जितना  ही चतुर,
जग में उस को उतना ही सम्मान और आदर मिला.
यह पुरातन सत्य  है  कि  वानर की हैं संतान हम,
आज  मानव रूप में भी हम को  वही  बन्दर मिला.
प्रेम  का  आश्रम   सजाने  के   लिए आ श्रम  करें,
ऐसे  कर्मों  का जगत में फल भी सदा सुन्दर मिला.
एक प्यारी सी  ग़ज़ल बन ही  गयी  इस पँक्ति  से ,
बहर  भी   है  ख़ूबसूरत   क़ाफ़िया  सुन्दर  मिला.
मन  में रामायण सा ही वो बस गया है  ऐ ‘लतीफ़’   
यूं  सतत् पावन  पठन का  उम्र  भर अवसर मिला.

©अब्दुल लतीफ़ ख़ान (दल्ली राजहरा).

Views: 859

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2012 at 7:51pm

 जल  जीवन  का   सार   है ,  परखो   जी    श्री मान !
देते     हैं    सन्देश    यही ,    गीता    और    क़ुरान !!

सुन्दर सन्देश देती उम्दा रचना बधाई लतीफ़ भाई 
Comment by लतीफ़ ख़ान on November 20, 2012 at 4:52pm

[1]   जल चरणों के श्लोक यह ,  जग हित में शुभ-लाभ !

       पी कर विष   प्रदूषण  का ,   हुआ   नीर   अमिताभ !!

[2]   पाट कर   सब ताल कुँए   ,   हम ने   की यह भूल !

       पानी  -  पानी    हो    गई     ,    निज  चरणों की धूल !!

[3]   कर न  पायें  दीपक  ज्यों   ,    तेल   बिना    उजियार !

        उसी  भाँति  यह नीर है     ,    जीवन    का    आधार !!

[4]   पिघल-पिघल कर ग्लेशियर,   देते    नित    संकेत !

        जल प्रलय अब दूर नहीं  ,     सब जन जाएँ  चेत !!

[5]    सूरज आग   उगल    रहा   ,      बढ़ता   जाए   ताप  !

        जल बिना यह जीवन है   ,    जैसे इक  अभिशाप !!

[6]    पानी   का क्या   मोल   है   ,     जाने     रेगिस्तान !

        जहाँ   उसे   इक बूँद   भी     ,     लागे   सुधा  समान !!

[7]    कहीं   बाढ़    सूखा    कहीं    ,     कहीं   सुनामी  ज्वार !

        मूर्ख   मानव   खोल   रहा    ,      जल   प्रलय  के  द्वार !!

[8]    सागर   से   बादल    बनें     ,      बादल   से यह नीर !

        जल  बिना यह  जीवन है   ,      सचमुच    टेढ़ी   खीर !!

[9]    अत्यधिक   जल दोहन से ,     सूख रहे   सब स्रोत !

         कैसे जल बिन फिर चलें ,      इस  जीवन  के पोत !!

[10]   नीर  बिना   जीवन   नहीं    ,      बाँधो   मन में   गाँठ !

         जीवन  रूपी  पुस्तक   का    ,      जल ही पहला  पाठ   !!

[11]   धन - दौलत   से   कीमती   ,      पानी   की   हर   बूँद !

         पानी   को   बरबाद     कर    ,       यूँ  ना   आँखें    मूँद !!

[12]   जल  कहे   यह मानव से    ,     नष्ट  न  करियो  मोय !

         अपितु मैं जल समाधि बन ,    नष्ट    करूँगा    तोय !!

[13]   जो  मानव  जन नित करें ,    पानी  का   सम्मान !

         उस  के   जीवन   में    रहे     ,    सदा   मधुर  मुस्कान !!

[14]   पानी    से   मत     पूछिए    ,     क्या  है  उस  का रंग   !

         रंग  जाए   उस   रंग    में     ,      मिल  जाए  जिस  संग !!

[15]  जल  जीवन  का   सार   है   ,       परखो   जी    श्री मान !

         देते     हैं    सन्देश    यही    ,        गीता    और    क़ुरान !!

[16]   स्वार्थ   पूर्ति   ही न बनें    ,        जीवन का  अभिप्राय !

       "लतीफ़" हम सब मिल करें ,   जल  रक्षण के उपाय !!

                                          लतीफ़ खान ,,  दल्ली राजहरा ...

Comment by लतीफ़ ख़ान on November 7, 2012 at 8:59pm

श्री अरुण कुमार निगम जी ,तरही ग़ज़ल में आप की कोशिश बहुत ही शानदार है। कोशिश करते रहिये ,कोशिशें अक्सर कामयाब होती हैं। सौरभ जी ने जो मशविरा दिया है एकदम सही है।उन के सुझाव अनुसार कार्य कीजिए ,सफलता की मंजिल दूर नहीं।।।।बधाई ...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 7, 2012 at 8:56pm

इस सुन्दर और सुगढ़ प्रस्तुति को मैं आज देख पा रहा हूँ. खेद है.

ग़ज़ल की प्रस्तुति में बहुत ही संयत प्रयास हुआ है. 

कांच   की  कारीगरी  में  जो   निपुण  थे  साथियों,
आजकल उन के ही  हाथों  में   हमें   पत्थर  मिला.
पेट भर  रोटी  मिली   जब   भूखे  बच्चों को  हुज़ूर,
सब कठिन प्रश्नों का उन को इक सरल उत्तर मिला.

इन दो अश’आर के लिये हृदय से बधाई स्वीकार करें, लतीफ़ भाई.   आपकी रचनाओं की प्रतीक्षा रहती है, फिर भी यह विशिष्ट ग़ज़ल अबतक छूट रही थी.

सादर

Comment by लतीफ़ ख़ान on November 7, 2012 at 8:29pm

शिखा कौशिक नूतन जी,,, उम्दा अशआर केलिए बधाई,, नारी शक्ति पर शशक्त रचना।

Comment by लतीफ़ ख़ान on November 7, 2012 at 8:16pm

श्री अरुण कुमार निगम जी ,तरही ग़ज़ल में आप की कोशिश बहुत ही शानदार है। कोशिश करते रहिये ,कोशिशें अक्सर कामयाब होती हैं। सौरभ जी ने जो मशविरा दिया है एकदम सही है।उन के सुझाव अनुसार कार्य कीजिए ,सफलता की मंजिल दूर नहीं।।।।बधाई ...

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 17, 2012 at 9:17am

“मीत मन से मन मिला तू और स्वर से स्वर मिला,”
कर लिया यह कर्म जिस ने उस को ही ईश्वर मिला.

बहुत सुन्दर मतला और दाद के काबिल हर शेर, सुन्दर गजल पर बधाई स्वीकार करें आद. अब्दुल लतीफ़ खान साहब.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 16, 2012 at 12:46pm

आदरणीय लतीफ़ खान साहब सादर प्रणाम
वाह वाह वा
क्या बात है इक इक शेर शानदार है
बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है सर जी
दाद पे दाद क़ुबूल कीजिये

Comment by AVINASH S BAGDE on October 16, 2012 at 11:28am

चापलूसी  की   कला  में  जो  है  जितना  ही चतुर,
जग में उस को उतना ही सम्मान और आदर मिला.

--
कर लिया यह कर्म जिस ने उस को ही ईश्वर मिला.

--

प्रेम  का  आश्रम   सजाने  के   लिए आ श्रम  करें,

वाह |लतीफ़ खान साहिब !!

Comment by रविकर on October 16, 2012 at 9:59am

वाह भाई वाह |
मजेदार ||
बधाई स्वीकारें , आदरणीय ||

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
23 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
yesterday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service