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क्या वजह क्या वजह कहर बरपा रहे
मेहरबां - मेहरबां से नजर आ रहे


ये दुपट्टा कभी यूँ सरकता न था

आज हो क्या गया यूँ ही सरका रहे


चूडियाँ यूँ तो बरसों से ख़ामोश थी

बात क्या है हुजूर आज खनका रहे


यूँ तो चेहरे पे दिखती थीं वीरानियां

औ अचानक बिना बात मुस्का रहे


दिल ये चर्चित का यूं ही बडा शोख है

देख लो आप ही इसको भडका रहे

- विशाल चर्चित

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Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on April 4, 2013 at 12:57am

शुक्रिया राम शिरोमणि भाई !!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on April 4, 2013 at 12:55am

बहुत - बहुत शुक्रिया राजेश कुमारी जी........!!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on April 4, 2013 at 12:55am

हृदय से आभार रक्ताले सर जी.........!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 4, 2013 at 12:47am

वाह भाई वाह !!

बधाई.

Comment by ram shiromani pathak on April 3, 2013 at 9:39pm

यूँ तो चेहरे पे दिखती थीं वीरानियां
औ अचानक बिना बात मुस्का रहे!!!!!!!!!!!!!!

बहुत सुन्दर गजल आदरणीय विशाल चर्चित जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 3, 2013 at 9:33pm

बड़ी मासूम सी प्यारी सी ग़ज़ल बहुत अच्छी लगी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 3, 2013 at 8:22pm

चूडियाँ यूँ तो बरसों से ख़ामोश थी
बात क्या है हुजूर आज खनका रहे...........वाह......क्या अंदाज है.

बहुत सुन्दर गजल आदरणीय विशाल चर्चित जी

कृपया ध्यान दे...

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