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प्रेम तुम्‍हारी कविता है

प्रेम तुम्‍हारी कविता है

और मेरा अहसास

रहते हैं कुछ ख्‍वाब पिरोए

दोनों दिल के पास

और अधर जब नीरव हंसते

साथ भींगती रात

बिंदिया पर बिखरे पड़े

सोते कुछ जज्‍बात

ऐसे में कुछ शब्‍द अचानक

गढ़ लेते कुछ रीत

सच कहता हूं ऐसे ही तो

बनते मेरे गीत

वक्‍त मिले तो पढ़ना उनको

और लगे जो खास

रख लेना ताबीज समझकर

उनको अपने पास

नहीं जानता किस मुकाम पर

रुक जायेंगें पांव

कहां गगन ये विस्‍मृत होगा

कहां छले ये छांव

(पूर्णतया मौलिक एवं अप्रकाशित)

 

 

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Comment by ajay sharma on November 28, 2013 at 9:57pm

वक्‍त मिले तो पढ़ना उनको

और लगे जो खास

रख लेना ताबीज समझकर

उनको अपने पास

नहीं जानता किस मुकाम पर

रुक जायेंगें पांव

कहां गगन ये विस्‍मृत होगा

कहां छले ये छांव........................wah .....shabd shabd .....par rukne ka man karta hai ......bahut bahut sunder rachna hetu bhadhayiyan

Comment by राजेश 'मृदु' on June 17, 2013 at 11:29am

आप सबका हार्दिक आभार

Comment by D P Mathur on June 15, 2013 at 8:41pm

रहते हैं कुछ ख्वाब पिरोए
दोनों दिल के पास
प्रेम की सुंदर रचना 

Comment by ram shiromani pathak on June 15, 2013 at 7:19pm

सुंदर रचना आदरणीय राजेश जी //////बधाई आपको!

Comment by coontee mukerji on June 15, 2013 at 7:02pm

हमेशा की तरह आपकी  एक और सुंदर प्रस्तुति . ...प्रेम की सुंदर भावनाओं को  मोती की तरह पिरोते हुए आपने दार्शनिक ही ढंग से इसका

अंतिम पंक्ति  को  विराम दिया है.....

रुक जायेंगें पांव

कहां गगन ये विस्‍मृत होगा

कहां छले ये छांव..........सादर /  कुंती.

Comment by Meena Pathak on June 15, 2013 at 6:32pm

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ....बधाई आप को 

Comment by vijayashree on June 15, 2013 at 6:29pm

ऐसे में कुछ शब्‍द अचानक

गढ़ लेते कुछ रीत

सच कहता हूं ऐसे ही तो

बनते मेरे गीत

 

अतिसुंदर भाव /हार्दिक बधाई  

Comment by Shyam Narain Verma on June 15, 2013 at 12:58pm

आदरणीय...उम्दा रचना के लिए शुभकामनाऐं.........................

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 15, 2013 at 8:56am

आ0 राजेश भाई जी,  अतिशय सुन्दर भाव भरा गीत ।  हार्दिक बधाई स्वीकारें।  सादर,

Comment by Abid ali mansoori on June 15, 2013 at 8:45am
एक सुन्दर एहसास से भरी रचना आदरणीय राजेश जी बधाई आपको!

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