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भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

भाषण में झूठे वादों से
अपने नापाक इरादों से
तुम ख्वाब दिखाके उड़ने के
खुद बैठे हो सैयादों से

बस नोट, सियासी इल्ली बन, तुम बोते हो सत्ताधारी   
भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

हर ओर मुफलिसी फांके हों  
यूँ रोज ही भले धमाके हों
कागज़ पे सुरक्षा अच्छी है
इस पर भी खूब ठहाके हों

पहले तो खेल सजाते हो फिर  रोते हो सत्ताधारी
भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

सारा सिस्टम है फेल यहाँ
नित महँगा होता तेल यहाँ
आतंकवाद में सिमटे से
होता है खूनी खेल यहाँ

खुद भार बने इस धरती का क्या ढोते हो सत्ताधारी
भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

बैठे लाशों के ढेरों पे
इन काल चक्र के फेरों पे
मजबूर लगे हो उलझे से
खुद रचे व्यूह के घेरों पे  

तुम मदद जरा सी करके भगवन होते हो सत्ताधारी
भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

है तुमको क्या जन हानि से
तुलसी कबीर की बानी से
गूंगे अंधे बहरे बन के
लेना देना बस रानी से

तुम भूल आज को कल में कैसे खोते हो सत्ताधारी
भारत की अस्मत लुटने तक क्यूँ सोते हो सत्ताधारी

संदीप पटेल "दीप"


मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on July 10, 2013 at 5:16pm

वाह आदरणीय मित्रवर वाह मजा आ गया क्या कहने सत्य सटीक सुन्दर प्रस्तुति भाई जी निम्नांकित पंक्तियों हेतु विशेष तौर पर  बधाई स्वीकारें.

है तुमको क्या जन हानि से
तुलसी कबीर की बानी से
गूंगे अंधे बहरे बन के
लेना देना बस रानी से

Comment by mrs.Preeti G.sharma on July 10, 2013 at 3:38pm
'Aadrniy sandip ji, sch me aaj hmare desh me, sattadhariyo ne aisi loot mcha rakhi hai, jesi aapne apni rachna me prastut ki hai, bdhai aapko
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 10, 2013 at 2:59pm

वाह ! सुन्दर और सामयिक गीत रचना द्वारा सत्ताधारियों को कोसती रचना के लिए हार्दिक बधाई

श्री संदीप कुमार पटेल जी , कुछ दिन व्यस्त रहे घर पर, ओबीओ समारोह में अनुपस्थिति रही |

घर पर शिशु सकुशल होगा | सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 9, 2013 at 9:17pm

बहुत बढ़िया अच्छी खबर ली सत्ताधारियों की बहुत बहुत बधाई प्रिय संदीप जी ,इतने दिन से कहाँ थे ?

Comment by राजेश 'मृदु' on July 9, 2013 at 6:26pm

बड़े अरसे के बाद आपको पढ़ा और आनंद आ गया

Comment by ajay sharma on July 8, 2013 at 11:09pm

wah wah wah wah...............sara ka sara sach hi hai .........sandeep ji behatreen qalam ke liye shubkamnayen

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 8, 2013 at 8:22pm

सत्ताधारियों पे खुल के भड़ास निकाला है आपने संदीपजी बहुत अच्छी रचना वाह

कृपया ध्यान दे...

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