देश में कैसा बदलाव अब हो गया
नंगपन है रईसी ग़ज़ब हो गया
जबसे इंग्लिश मदरसे खुले, बाप और
माँ को आँखें दिखाना अदब हो गया
हाथ जोड़े थे जिसने कभी वोट को
आज कुर्सी पे बैठा तो रब हो गया
अब गधों की फ़तह, मात घोड़ों की हो
दौर दस्तूर कैसा अजब हो गया
हर्फ के कुछ उजाले लुटा प्यार से
"दीप" खुर्शीद सा जाने कब हो गया
संदीप पटेल "दीप"
(मौलिक व अप्रकाशित)
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जबसे इंग्लिश मदरसे खुले, बाप और
माँ को आँखें दिखाना अदब हो गया
हाथ जोड़े थे जिसने कभी वोट को
आज कुर्सी पे बैठा तो रब हो गया
क्या कहने भाई ... बहुत खूब
एक बार फिर से जय हो आपकी
बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय दाद क़ुबूल फरमाएँ
आदरणीय संदीप जी:
बहुत खूबसूरत गज़ल है। बधाई।
सादर,
विजय निकोर
जबसे इंग्लिश मदरसे खुले, बाप और
माँ को आँखें दिखाना अदब हो गया ------बहुत सुन्दर | वाह ! संदीप भाई हार्दिक बधाई
आ0 संदीप भाई जी, सुन्दर गजल हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें। सादर,
वाह भाई वाह, अच्छी ग़ज़ल कही है, सभी शेर बढ़िया हुए हैं, कृपया वजन लिख दें जिससे तकती समझने में आसानी हो, एक शेर पर मुझे डाउट है ....क्या मिसरा अपूर्ण हो सकता है ?
जबसे इंग्लिश मदरसे खुले, बाप और
माँ को आँखें दिखाना अदब हो गया
दाद कुबूल करें संदीप भाई ।
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