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जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई [गजल]

बहर में लिखने का प्रथम प्रयास 

2 1 2  2 1 2  2 1 2  2 1 2

.
जिंदगी में तुम्हारी कमी रह गई
प्यास मेरी अधूरी यही रह गई

आशियाने बहे ना डगर ही मिली
सूचना आसमानी धरी रह गई

घोर तांडव हुआ खैर पा ना सके
फूल तोडा गया बस कली रह गई

ये कयामत चली लेखनी की तरह
ख़्वाब टूटे मगर चोट भी रह गई

ये ख़ुशी नागवारी खुदा को हुई
तो अकड़ आदमी की धरी रह गई

पेड़ काटे अगर तो सही त्रासदी
पेड़ रोपे धरा फिर हरी रह गई
........................................

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 787

Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 2, 2013 at 12:59am

इस ज़मीन पर आपका प्रयास अच्छा लगा. बह्र को साधने के क्रम में कई मिसरे अस्पष्ट या असंप्रेष्य रह गये हैं. लेकिन यह शुरुआती दौर है. प्रयासरत रहें.

सादर शुभेच्छाएँ

Comment by Ketan Parmar on July 31, 2013 at 9:10pm

पेड़ काटे अगर तो सही त्रासदी
पेड़ रोपे धरा फिर हरी रह गई

बहुत ही सुन्दर ......आदरणीय सरिता जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 30, 2013 at 6:22pm

अच्छा प्रयास है सरिता जी ऐसे ही लिखती रहें, इस रचना के लिए दाद क़ुबूल करें

Comment by vandana on July 28, 2013 at 8:00am

बहुत ही सुन्दर ......आदरणीय सरिता जी 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 27, 2013 at 8:19pm

आदरणीया ...सरिता जी , सुंदर रचना प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई ...

Comment by बृजेश नीरज on July 26, 2013 at 10:08pm

आदरणीया सरिता जी बहुत ही सुन्दर प्रयास है आपका! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by ram shiromani pathak on July 26, 2013 at 9:03pm

आदरणीया सरिता जी!बढ़िया प्रयास किया ग़ज़ल पर//बहुत सुन्दर//हार्दिक बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 26, 2013 at 7:55pm

वाह क्या बात है बहुत बढ़िया प्रयास किया ग़ज़ल पर अति सुन्दर मन प्रसन्न हो गया बहुत- बहुत बधाई प्रिय सरिता जी 

Comment by annapurna bajpai on July 26, 2013 at 12:21pm

आ0 सरिता जी बहुत सुंदर प्रयास के लिए हार्दिक बधाई ।

 

Comment by वेदिका on July 26, 2013 at 12:19pm

बहुत ही खूबसूरत प्रयास के लिए बधाई स्वीकारें 

आदरणीया सरिता जी!

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