बह्र : २१२२ १२१२ २२
---------
याँ जो बंदे ज़हीन होते हैं
क्यूँ वो अक्सर मशीन होते हैं
बीतना चाहते हैं कुछ लम्हे
और हम हैं घड़ी न होते हैं
प्रेम के वो न टूटते धागे
जिनके रेशे महीन होते हैं
वन में उगने से, वन में रहने से
पेड़ खुद जंगली न होते हैं
उनको जिस दिन मैं देख लेता हूँ
रात सपने हसीन होते हैं
खट्टे मीठे घुलें कई लम्हे
यूँ नयन शर्बती न होते हैं
--------
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
Comment
वन में उगने से, वन में रहने से
पेड़ खुद जंगली न होते हैं ,,,,, क्या कहन है!
बीतना चाहते हैं कुछ लम्हे
और हम हैं घड़ी न होते हैं,,,,, लाजवाब!
बहुत शिद्दत से कही गज़ल पर ढेरों दाद लीजिये!!
वाह वाह क्या बात है
प्रेम के धागे .............तजुर्बा भर दिया है आपने आदरणीय
सपने हसीं ..........प्रेमियों का हालेदिल बयान हो गया
और मतअले के लिए तो दाद पे दाद क़ुबूल फरमाइए सर जी
ग़ज़ब ग़ज़ब ग़ज़ब
उनको जिस दिन मैं देख लेता हूँ
रात सपने हसीन होते हैं...mubarak ho ..धर्मेन्द्र कुमार सिंह bhai.
इस सुन्दर गज़ल के लिए बधाई।
प्रेम के वो न टूटते धागे
जिनके रेशे महीन होते हैं.......
उनको जिस दिन मैं देख लेता हूँ
रात सपने हसीन होते हैं.............
वाह वाह क्या बात कही है, आदरणीय धर्मेंद्र कुमार जी ..
सुंदर रचना के लिए बधाई....
याँ जो बंदे ज़हीन होते हैं
क्यूँ वो अक्सर मशीन होते हैं.....
बेहद उम्दा गज़ल... हार्दिक बधाई स्वीकार करें आ. धर्मेन्द्र जी
बधाई आपको एक सुन्दर ग़ज़ल से रु ब रु कराने के लिए
अद्भुत चमत्कृत करती शैली की ग़ज़ल आ. धर्मेन्द्र जी बहुत बधाई कमाल कमाल क़माल !!!
सुंदर ग़ज़ल
//याँ जो बंदे ज़हीन होते हैं
क्यूँ वो अक्सर मशीन होते हैं// बहुत बढ़िया बेहतरीन शे'र
आदरणीय धर्मेन्द्र जी इस ग़ज़ल के लिये दिली दाद कुबूल करें
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
© 2024 Created by Admin. Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |
You need to be a member of Open Books Online to add comments!
Join Open Books Online