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मन में पसरे घोर तम का नाश होना चाहिए

ज्ञान का चहुँ ओर यों प्रकाश होना चाहिए

मन में पसरे घोर तम का नाश होना चाहिए

 

बढ़ रही तकनीक क्रांति ला रहे उद्योग अब

तब तो मेरे गाँव का विकाश होना चाहिए

 

देखता है स्वप्न सोते जागते दिन रात मन

बाँधने मनगति को तप का पाश होना चाहिए  

 

जीतने का हर समय प्रयास करना है उचित

हार कर हमको नहीं निराश होना चाहिए

 

घर के भीतर “दीप” जलना सिद्ध होता है सही

आपका भगवान् से निकाश होना चाहिए

 

निकाश - समीपता   

 

संदीप पटेल “दीप”

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 22, 2013 at 1:41pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी, आदरणीय आशुतोष जी, आदरणीय रवि जी, आदरणीया गीतिका दीदी, आदरणीय नीरज कुमार जी, आदरणीय शिज्जू जी, आदरणीय गोपाल सरजी , आदरणीय अरुण भाई साहब, आदरणीय गिरिराज सर, आदरणीय जीतेन्द्र जी, आदरणीय सौरभ सर जी ...........आप सभी के उत्साहवर्धन और मार्गदर्शन के लिए आभारी हूँ ....स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

आदरणीय सौरभ सर जी आप क्या कहते कहते रुक गए हैं

कुछ मार्गदर्शन सुझाव या डांट लगानी हो तो मैं तैयार हूँ

जय हो


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 22, 2013 at 2:01am

ऐसा ?? ...

ख़ैर ........

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 22, 2013 at 12:58am

बहुत सुंदर व् सार्थक संदेश देती हुयी  गजल पर, बधाई स्वीकारें आदरणीय संदीप जी

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on November 21, 2013 at 9:48pm

बहुत खूब रचना आदरणीय गिरिराज भाई साहब की बात पर गौर फरमा लीजिये और सोने पे सुहागा हो जाएगा 

दिली मुबारकबाद आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 21, 2013 at 4:46pm

आदरनीय सन्दीप भाई , लाजवाब द्विपदियों के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!!

घर के भीतर “दीप” जलना सिद्ध होता है सही --  की जगह ---घर के भीतर “दीप” जलना सिद्ध करता है यही

पढ के एक बार  देख लें , शायद जादा सही लगे !!!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 21, 2013 at 12:19pm

आदरणीय प्रिय मित्रवर बहुत ही सुन्दर संदेशात्मक गजल रची है आपने खूबसूरत अशआर हुए हैं मित्र बधाई स्वीकारें .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 20, 2013 at 9:21pm

देखता है स्वप्न सोते जागते ------- इतना अच्छा लिखकर  फिर यह क्या --- 

आपका भगवान् से निकाश होना चाहिए ------ पटेल जी चाहे जितना दम लगाना पड़े

पर ऐसा समझौता न करे i आप तो काफी प्रतिभावान है  i मेरा स्नेह i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 20, 2013 at 8:28pm

//ज्ञान का चहुँ ओर यों प्रकाश होना चाहिए

मन में पसरे घोर तम का नाश होना चाहिए//  बहुत बढ़िया आदरणीय संदीप जी

इस ग़ज़ल के लिये दिली दाद कुबूल करें

Comment by Neeraj Neer on November 20, 2013 at 8:02pm

बहुत सुन्दर सन्देश देती रचना के लिए बधाई ..

Comment by वेदिका on November 20, 2013 at 4:00pm

देखता है स्वप्न सोते जागते दिन रात मन

बाँधने मनगति को तप का पाश होना चाहिए,, बहुत सुंदर बंद है

ज्ञान का चहुँ ओर यों प्रकाश होना चाहिए

मन में पसरे घोर तम का नाश होना चाहिए,,, हृदय से निकली कामना बहुत प्रभावशाली है!

कहीं कहीं मुझे समझ नहीं आ रहा,  //तब तो मेरे गाँव का विकाश होना चाहिए// विकाश सही है या विकास! 

सुंदर और सार्थक द्विपदियाँ रची है, बधाई प्रेषित है!

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