For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

किसी सोच में कभी डूब के जो लिखा न हो औ कहा न हो

वो ग़ज़ल है क्या और वो गीत क्या किसी दिल को जिसने छुआ न हो

 

मेरी शाईरी में है जो निहाँ मेरे हर्फ़ में वो रवाँ रवाँ

मेरी है दुआ उसी रब से के कहूँ जब मैं कोई खफा न हो

 

ज़रा पूछिए किसी आदमी से छुआ है कैसे ये आसमाँ

क्या सफ़र में फर्श से अर्श के कोई है वो जो कि गिरा न हो

 

कहे माँ कहीं मिलें गर्दिशें तो खुदा दिखाता है रास्ता

इसी मोड़ पर मेरे वास्ते वो चराग ले के खडा न हो

 

हुआ “दीप” तू भी तो मतलबी बिना काम के तू भी कब मिला

कोई बात ऐसी करी नहीं छुपा जिसमें कोई नफा न हो

संदीप पटेल "दीप"

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 753

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2013 at 10:52am

आदरणीया गीतिका दीदी आपका ह्रदय से धन्यवाद स्नेह यूँ ही  बनाये रखिये सादर

Comment by वेदिका on December 1, 2013 at 10:49am

मेरी शाईरी में है जो निहाँ मेरे हर्फ़ में वो रवाँ रवाँ

मेरी है दुआ उसी रब से के कहूँ जब मैं कोई खफा न हो ......बेहतरीन शेअर हुआ है! 

बेहतरीन गज़ल पर हार्दिक बधाई प्रिय संदीप भैया!!

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2013 at 10:41am

आदरणीय गिरिराज सर जी सादर आभार आपका सराहना हेतु

औ को गिराने के लिए गुरुजन और अग्रजों के विचारों का इंतज़ार है वो जैसा कहेंगे मान्य होगा

सादर

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2013 at 10:40am

आदरणीय जितेन्द्र जी सादर धन्यवाद आपका स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2013 at 10:39am

आदरणीय डॉ गोपाल सर आपका ह्रदय से आभार

स्नेह यूँ ही बनाये रखिये


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 1, 2013 at 7:19am

आदरनीय सन्दीप भाई , सुन्दर तरही गज़ल कही है , आपको बधाई ,

आदरणीय शिज्जू भाई की बात मुझे भी सही लग रही है,  औ की मात्रा गिराना शायद सही नही है !!!!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 1, 2013 at 1:34am

ज़रा पूछिए किसी आदमी से छुआ है कैसे ये आसमाँ

क्या सफ़र में फर्श से अर्श के कोई है वो जो कि गिरा न हो............वाह! बहुत बेहतरीन शेर

बहुत बढ़िया गजल, दिली दाद कुबूल करें आदरणीय संदीप जी

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 30, 2013 at 11:08pm

दीप जी

ग़ज़ल की भाव सम्पदा मुझे अच्छी लगी

शिल्प के बारे में गुनीजन जाने i

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 30, 2013 at 8:21pm

आदरणीय शिज्जू जी सादर

आपने ग़ज़ल को सराहा उसके लिए आभार आपका स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

मुझे लगा के गिरा सकते हैं सो गिरा के कह लिया और ऐसा करने में मुझे कहीं भी अटकाव की स्थिति भी नहीं लगी

बाकी तो अग्रज और गुरजन ही इस पर कुछ विशेष राय दे सकते हैं जिससे कुछ और ज्ञान अर्जित किया जा सके

सादर धन्यवाद आपका


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on November 30, 2013 at 8:15pm

//ज़रा पूछिए किसी आदमी से छुआ है कैसे ये आसमाँ

क्या सफ़र में फर्श से अर्श के कोई है वो जो कि गिरा न हो// इस बेहतरीन शेर के लिये दाद कुबूल करें

आदरणीय संदीप जी क्यूँकि और को गिरा के हम पढ़ रहें हैं उसके बाद को फिर गिराना क्या सही होगा???

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
30 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
3 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service