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दीवाने भी अज़ब हैं वो जो महफ़िल लूट लेते हैं ।
के सिर कदमों में रखते हैं और दिल लूट लेते हैं ।

कि जिन लहरों के तूफानों ने लूटी कश्तियाँ लाखों ,
उन्हीं लहरों के आवेगों को साहिल लूट लेते हैं ।

शाख से टूटकर अपनी बिखर जाते हैं जो तिनके ,
बनाने को घरौंदे उनको हारिल लूट लेते हैं ।

अदब तो दोस्ती का है पर अदायें दुश्मनों सी हैं ,
के हमारा चैन उनके नैन कातिल लूट लेते हैं ।

मोहब्बत करने वालों का ख़ुशी से वास्ता क्या है ,
यहाँ तो दर्द के कतरे भी संग दिल लूट लेते हैं ।

मौलिक व अप्रकाशित

नीरज 'प्रेम'

Views: 908

Comment

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Comment by Neeraj Nishchal on January 9, 2014 at 4:54pm

आदरणीय भंडारी जी बहुत बहुत शुक्रिया रचना कि कमियों हेतु भी आगाह करने के लिए ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 9, 2014 at 12:43am

आप जबतक खुद बह्र को ग़ज़ल के साथ नहीं लिखेंगे आपकी ग़ज़ल बेबह्र हो कर ख़ारिज़ होती रहेगी. आप ही बताइये कि मिसरों का वज़्न क्या है. विधा कोई हो उसे निभाना अधिक जरूरी है. वर्ना गद्य लीखिये.

शुभेच्छाएँ


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 7, 2014 at 4:20pm

भाई नीरज 'प्रेम' जी, बढ़िया ग़ज़ल हुई है. लगभग सभी अश'आर प्रभावित करते हैं. मेरी दिली बधाई स्वीकारे। निम्नलिखित शेअर में तकाबुल-ए-रदीफ़ैन नामक ऐब है, उसकी तरफ ध्यान अवश्य दें.      

//अदब तो दोस्ती का है पर अदायें दुश्मनों सी हैं ,
के हमारा चैन उनके नैन कातिल लूट लेते हैं । ।//

Comment by annapurna bajpai on January 5, 2014 at 8:19pm

मोहब्बत करने वालों का ख़ुशी से वास्ता क्या है ,
यहाँ तो दर्द के कतरे भी संग दिल लूट लेते हैं ।........................... उम्दा ,  बधाई । 

Comment by बृजेश नीरज on January 5, 2014 at 10:38am

बहुत ही सुन्दर रचना! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Amod Kumar Srivastava on January 4, 2014 at 7:46pm

बहुत ही उम्दा लाईन ... 

मोहब्बत करने वालों का ख़ुशी से वास्ता क्या है ,
यहाँ तो दर्द के कतरे भी संग दिल लूट लेते हैं ....

भाव-पूर्ण रचना ... बंधुवर बधाई स्वीकार करें ... 

Comment by coontee mukerji on January 3, 2014 at 9:57pm

मोहब्बत करने वालों का ख़ुशी से वास्ता क्या है ,
यहाँ तो दर्द के कतरे भी संग दिल लूट लेते हैं ।.....बहुत सुंदर....हार्दिक बधाई आपको नीरज भाई.

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on January 3, 2014 at 8:08pm

वाह वाह वाह क्या बात शानदार रचना हेतु बधाई आपको,,,,,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 3, 2014 at 6:07pm

आदरणीय नीरज भाई , बहुत खूबसूरत भाव पूर्ण रचना की है , आपको बधाइयाँ ॥ अगर आपने गज़ल कही है तो सभी शेर एक बहर में नही लग रहा है  अन्यथा रचना बहुत अच्छी है ॥

कृपया ध्यान दे...

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