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मेरी अगर माँ ना होती

मेरी अगर माँ ना होती
मैं कहाँ से होता,
किसकी अंगुली पकड़ के चलता
किसका नाम लेकर रोता.

चलना फिरना हँसना गाना
तेरी भांति माँ मुस्काना
प्रेम के एक एक आखर
पग पग संस्कार सिखलाना
गोदी में सिर रखकर आखिर
निर्भीक कहाँ मैं सोता .

दुनियांदारी के कथ्य अकथ्य
जीवन यात्रा के सत्य असत्य
रंगमंच के सारे पक्ष
कुछ प्रत्यक्ष, कुछ नेपथ्य
राजा रानी  के किस्सों संग
मन माला में कौन पिरोता..

ये जो वायु, आती जाती है
बल, रूप, यौवन सजाती है
दुनियां भर के सारे सुख
नित्य नवीन दिखलाती है
ये तो ऋण तुम्हारा है माँ
बस रहता हूँ मैं ढोता.

मेरी अगर माँ ना होती
मैं कहाँ से होता.

... नीरज कुमार नीर 

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Meena Pathak on May 11, 2014 at 2:19pm

बहुत सुन्दर .. भावपूर्ण रचना , बधाई 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 11, 2014 at 10:31am

आदरणीय नीरज भाई मातृ दिवस पर माँ को समर्पित इस भवपूर्ण गीत के लिए कोटि कोटि बधाई .


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Comment by शिज्जु "शकूर" on May 11, 2014 at 7:36am

बहुत सुन्दर गीत आदरणीय नीरज नीर जी इस भावपूर्ण गीत के लिये हार्दिक बधाई

Comment by MAHIMA SHREE on May 10, 2014 at 11:30am

 मेरी अगर माँ ना होती
मैं कहाँ से होता. बहुत सी सुंदर भावुक करती रचना .. आदरणीय नीरज जी हार्दिक बधाई आपको ..

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