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ग़ज़ल - बेख़ुदी की बात कर

(2212 2212)

या बेख़ुदी की बात कर।
या दिल्लगी की बात कर। 

तू ये बता क्या हाल है?
अपनी ख़ुशी की बात कर। 

अब उस सदी की बात क्यूँ?
तू इस सदी की बात कर। 

जो याद करता हो तुझे,
तू भी उसी की बात कर। 

या तो ख़ुदा का नाम ले,
या बंदगी की बात कर। 

जो कान में रस घोल दे,
उस बांसुरी की बात कर। 

है क्या रखा इस जंग में?
कुछ आशिक़ी की बात कर। 

जो भेंट ज्वाला की चढ़ी,
उस लाडली की बात कर।

क्या ख़ुदकुशी से हल मिला?
अब ज़िंदगी की बात कर।

ताले ज़बां के खोल दे,
मत बेबसी की बात कर।

तू ले मज़ा इस रात का,
बस चाँदनी की बात कर।

तू-मैं, ख़ुदा तो हैं नहीं,
चल आदमी की बात कर!

जिसपे फ़िदा है 'ज़ैफ़' तू,
उस सांवरी की बात कर।

"मौलिक व अप्रकाशित"©

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Comment by coontee mukerji on May 28, 2014 at 7:53pm

सुंदर गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाई.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 28, 2014 at 7:30pm

क्या ख़ुदकुशी से हल मिला? 
अब ज़िंदगी की बात कर। -   सुन्दर और सार्थक गजल रचना | बहुत बहुत बधाई 

Comment by gumnaam pithoragarhi on May 28, 2014 at 6:20pm

waah bahut khoob bhai ji achchhi gazal kahi hai badhai sweekaren,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by Shyam Narain Verma on May 28, 2014 at 4:17pm
बहुत बढ़िया ग़ज़ल.....
Comment by MUKESH SRIVASTAVA on May 28, 2014 at 2:51pm

 ek pyaaree gazal ke liye DAAD sweekar karen

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 28, 2014 at 2:09pm

या तो खुदा का नाम ले या बंदगी की बात कर i

                   और

तू-मै खुदा तो है नहीं चल आदमी की बात कर i

वह यमित जी i दिल मोह लिया i बहुत सुन्दर i भाव पक्ष अति सबल i बधाई हो i

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