For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सदा सुहागन (लघुकथा) रवि प्रभाकर

“बहन ! ये औरतें गठड़ियों में क्या ले जा रही हैं ?”
”विधवा औरतों के लिए कैंप लगा है, वहां उन्हें महीने भर का राशन बांटा जा रहा है।”
पिछले तीन दिन से भूखी सुखिया ने नशे में धुत्त लेटे अपने पति को ऐसे देखा मानो आज  उसे अपने “सुहागन” होने पर पछतावा हो रहा था.

(मौलिक और अप्रकाशित)

Views: 616

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 11, 2014 at 12:21am

सुखिया की आँखों से उफनता निठल्ले पति के लिए तिरस्कार को जिन शब्दों में बाँधा गया है उसके लिए संवेदनशील हृदय चाहिये.

इस सफल लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई भाईजी.

इसके साथ ही, आदरणीय़ शरदिन्दु जी ने बहुत ही मार्के की बात उठायी है. इसका अवश्य संज्ञान में लें.

शुभ-शुभ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on July 10, 2014 at 1:33am
एक अच्छी लघुकथा....लेकिन....एक प्रश्न उठता है मन में. यह रचना मौलिक और अप्रकाशित है ऐसी घोषणा नहीं की गयी है. क्या रचनाओं को पोस्ट करने के नियम में फेर-बदल हुआ है? - शरदिंदु
Comment by अरुन 'अनन्त' on July 6, 2014 at 5:15pm

वाह आदरणीय सुखिया मौन रहकर भी कितना कुछ कह रही है, बेहतरीन लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by Shubhranshu Pandey on July 6, 2014 at 4:02pm

आदरणीय रवि जी, 

सुखिया के दुःख को बडे़ मर्मिक ढंग से उकेरा है...बधाई.

सादर.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 6, 2014 at 12:37pm

रवी जी 

आपने सुन्दर लोक कथा  बुनी है i शिल्प बहुत अच्छा हैi

Comment by विनय कुमार on July 6, 2014 at 12:24am

बेहतरीन लिखा है आपने , साधुवाद..

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 5, 2014 at 10:12pm

सच ही है ऐसे पति से , पति का न होना बेहतर. बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय रवि जी हार्दिक बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 5, 2014 at 7:14pm

सच ये लघु कथा अन्दर तक झिंझोड़ देती है ...अपना सन्देश छोड़ने में कामयाब लघु कथा बहुत बढ़िया |आपको बधाई आ० रवि प्रभाकर जी |

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 5, 2014 at 4:35pm

kuchh log gaali hote hain jeewan ke liye ,,,,,,,,,,,,,,,, achhhi lagi,,,,,,,,,,,, badhai..............

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
yesterday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
Sunday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service