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गजल - "एक तरफा प्यार की ये बेबसी मत पूछिये"

2122 2122 2122 212

एक तरफा प्यार की ये बेबसी मत पूछिये ।
रात दिन रहती है कैसी बेखुदी मत पूछिये ।

अब खुशी का साथ छूटे एक अरसा हो गया ,
किस कदर गम से हुयी है दोस्ती मत पूछिये ।

बोलती आँखेँ हैँ मेरी और लब खामोश हैँ ,
किस तरह आवाज दिल की है दबी मत पूछिये ।

लाख रोयेँ लाख तडपेँ पर भला किस से कहेँ ,
वो दिखायेँ हमको कैसी बेरुखी मत पूछिये ।

वाह वाही कीजिये गर दिल छुये मेरी गज़ल ,
कैसे हम करने लगे हैँ शायरी मत पूछिये ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 1866

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Comment by Neeraj Nishchal on December 2, 2014 at 11:03am
बहुत बहुत शुक्रिया मिथिलेश जी

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 2, 2014 at 1:36am
बहुत अच्छी ग़ज़ल बन गई है। बधाई हो आपको।
Comment by Neeraj Nishchal on December 1, 2014 at 11:39am
शुक्रिया गोपाल नारायण जी
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 1, 2014 at 10:12am

नीरज जी

बहुत  सुन्दर i

Comment by Neeraj Nishchal on November 30, 2014 at 8:43pm
शुक्रिया राहुल जी
Comment by Rahul Dangi Panchal on November 30, 2014 at 4:58pm
वाह! बहुत सुन्दर भाव है
Comment by Neeraj Nishchal on November 30, 2014 at 9:39am
आदरणीय उमेश जी बहुत बहुत आभार
Comment by umesh katara on November 30, 2014 at 9:20am

सुन्दर ग़ज़ल वाहहहहहहह

Comment by Neeraj Nishchal on November 29, 2014 at 6:13pm
बहुत बहुत धन्यवाद राम शिरोमिणि पाठक जी ।
Comment by ram shiromani pathak on November 29, 2014 at 3:19pm

वाह वाह नीरज भाई दिल खुश कर दिया आपने ///बहुत बहुत बधाई आपको 

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