For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

-"देखो ये लाल-पीले आकाश मेँ उड़कर जाते पंछी कितने प्यारे लगते हैँ न?"
-"हाँ, भइया। आप ठीक कहते हो। ", उसने कुछ बेरूख़ी से कहा।

-"पर तूने क्यूँ चहकना बन्द कर रखा है आजकल, मेरी चिरैया?
कुछ बता तो क्या बात है?"

-"अब भइया मैँ क्या कहूँ ? आप परेशान हो जाओगे।"

-"तू बता तो बाकी सब मुझ पर छोड़।"
"भइया मुझे हॉस्टल मेँ नही रहना। मेर दम घुटता है वहाँ। वो सारी लड़कियाँ मुझे डाँटती रहती हैँ मुझे बात भी नही करने देती उन्हे डिस्टर्ब होता है न।
मैँ बाहर भी नही जा पाती। कभी कभी लगता है किसी ने मुझे नज़रबन्द कर दिया हो। कैद होकर रह गई हूँ।
पिँजरोँ मेँ चिरैया कैसे उड़ेगी?"

उसकी डबडबाई आँखोँ से आँसू का एक कतरा गिरता उससे पहले ही उस अनन्त सागर को अपनी बाँहोँ मेँ समेटकर रोकते हुए उसका सारा दर्द अपने अन्दर खीँच लिया उस भाई ने और उसे आश्वस्त करते हुए बोला-
"अब तुझे कभी खुद से दूर नही करूँगा।"

और गुड़िया भाई का हाथ थामे उस लाल-पीली शाम मेँ खुद को अनन्त आकाश मेँ उड़ते पँछियोँ सा आज़ाद महसूस करने लगी।

"पूजा"
"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 333

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by pooja yadav on January 1, 2015 at 9:29am

dhanywaad mithilesh ji


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 30, 2014 at 8:58pm
स्वतंत्रता के नए आयाम। संवाद शैली की रचना की विशिष्टताओं के विषय में तो मैं नहीं जानता लेकिन आदरणीय सौरभ सर की टिप्पणी के बरक्स लघुकथा को पढ़ा है। अच्छी लघुकथा है। इस शैली में मैं भी लिखने को प्रेरित हो रहा हूँ। आपको इस बहुत सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाई।
Comment by pooja yadav on December 30, 2014 at 8:15pm
Maaf kijiyega aadarneey saurabh ji. .kintu aapki pratikriya ka arth samajhne mein aksham hu. .kripya vistaar se samjhaye. .
Meri rachna par aapki upasthiti ke liye haardik aabhar. . .

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 28, 2014 at 8:54pm

’लघुकथा’ संवाद शैली में प्रस्तुत हुई है.
यदि व्यक्तिगत स्मृतियाँ निहित न हों, तो ये संवाद कोई शैलीगत प्रस्तुति नहीं बना पा रहे हैं.
आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद.
शुभेच्छाएँ.

Comment by pooja yadav on December 28, 2014 at 8:24pm
Iske atirikt dr. Gopal narayan shrivastava, hari parakash dubey ji, rajesh kumari ji, somesh kumar ji. . .meri rachnao par niyamit roop se pratikriya dene ke liye aapki tahe dil se aabhaari hu. .
Comment by pooja yadav on December 28, 2014 at 8:21pm
Aadarneey yograj ji. .aagaami rachnao mein aapki pratikriya ka sangyaan avashya lungi. .

Aapne hi mujhe kalam pakadna sikhaya h. .ath aapse aage bhi maargdarshan ki apeksha hai. . .apna amulya samay dekar mujhe anugraheet karein. .
Comment by pooja yadav on December 28, 2014 at 8:17pm
Pratikriyao ke liye Aap sabhi ka haardik aabhar. .
Comment by somesh kumar on December 20, 2014 at 12:02am

सबके अपने-अपने दायरे हैं उसी के अनुसार हमारा पिंजरा तय होता है .किसी के लिए खुला आकाश भी एक बंधन/कैद /पिंजरा हो सकता है |अच्छी कोशिश है 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on December 19, 2014 at 2:51pm

//"भइया मुझे हॉस्टल मेँ नही रहना। मेर दम घुटता है वहाँ। वो सारी लड़कियाँ मुझे डाँटती रहती हैँ मुझे बात भी नही करने देती उन्हे डिस्टर्ब होता है न।//

ये क्या बात हुई पूजा यादव जी ? क्या भाई इतना अहमक है कि इतनी सी बात पर हॉस्टल छुड़वा रहा है ? रैगिंग या किसी अन्य भेदभाव की बात होती या भाई से दूरी बर्दाश्त न कर पाने का दुःख होता तब भी कुछ बात बन सकती थी। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 18, 2014 at 8:07pm

अच्छी लघुकथा... हर भाई अपनी बहन के दुःख समेटे हर बहन भाई के तो ये दुनिया सबसे खूबसूरत हो जाए ..बहुत- बहुत बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आ. भाई सतविन्द्र जी, गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
10 minutes ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)
"आद0 रूपम कुमार जी सादर अभिवादन ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है। बधाई स्वीकार कीजिये। आद0 रवि भसीन साहिब की…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सालिक गणवीर's blog post ग़ज़ल ( उकता गया हूँ इनसे मेरे यार कम करो....)
"आद0 सालिक गणवीर जी सादर अभिवादन आपके हवाले से एक बेहतरीन मुरस्सा ग़ज़ल पढ़ने को मिली। शैर दर शैर बधाई…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रतिक्रिया का हृदयतल से अभिनन्दन और आभार।…"
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको
"आद0 चेतन प्रकाश जी सादर अभिवादन, आपकी आत्मीय प्रतिक्रिया उत्साहवर्धक है। आभार निवेदित करता हूँ। सादर"
1 hour ago
Neelam Dixit replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"हार्दिक आभार आदरणीय सतविंद्र जी।"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय सालिक गणवीर साहिब, आदाब। ग़ज़ल पर आप की हाज़िरी और हौसला-अफ़ज़ाई के लिए बहुत शुक्रिया हुज़ूर!"
1 hour ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post किसे आवाज़ दूँ (ग़ज़ल - शाहिद फ़िरोज़पुरी)
"आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' साहिब, ग़ज़ल को पसंद करने के लिए, हौसला बढ़ाने के लिए, और आपके…"
1 hour ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आभार आदरणीय सतविंदर भाई।"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीय धामी जी उम्दा अशआर कहे हैं, दिली मुबारकबाद"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"अच्छे छन्द कहे आदरण्या बबिता गुप्ता जी, हार्दिक बधाई"
2 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117
"आदरणीया नीलम दीक्षित जी, अच्छे दोहे कहे।"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service