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ग़ज़ल : शुभ सजीला आपको नव साल हो.

ग़ज़ल : शुभ सजीला आपका नव साल हो.

 

गर्व से उन्नत सभी का भाल हो.

शुभ सजीला आपका नव साल हो.

 

कामना मैं शुभ समर्पित कर रहा,

देश का गौरव बढ़े खुश हाल हो.

 

आसमां हो महरबां कुछ खेत पर,

पेट को इफरात रोटी दाल हो.

 

मुल्क के हर छोर में छाये अमन,

हो तरक्की देश मालामाल हो.

 

आदमी बस आदमी बनकर रहे,

जुल्म शोषण का न मायाजाल हो.

 

मन्दिरों औ मस्जिदों को जोड़ दें,

घोष जय धुन एक ही सुरताल हो.

 

भेद फिरकों का न हो इंसान में,

एक ऐसा भी सुनहरा काल हो.    

**हरिवल्लभ शर्मा 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by harivallabh sharma on December 28, 2014 at 10:00pm

आदरणीय शिज्जू 'शकूर' साहब आपकी मार्गदर्शक टीप का आभार...आपने हमेशा  प्रोत्साहित किया..हार्दिक शुक्रिया...मैंने गाना 'आइये मेहरवां" सुना था ..उसके अनुसार .म+हर+वां.1 2 2..समझ लिया था..जैसा आप गुनिजन राय देते हैं..सादर...तदनुसार बदला जा सकता है.

Comment by Rahul Dangi Panchal on December 28, 2014 at 8:52pm
बहुत सुन्दर गजल आदरणीय

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 28, 2014 at 8:30pm

नववर्ष की शुभकामनाओं को साझा करती आपकी इस ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई आदरणीय हरिभाईजी.
कई-कई पहलुओं के माध्यम से शुभेच्छाएँ विदित हुई हैं.

अलबत्ता,
कामनाये शुभ समर्पित कर रहा,... . कौन ? इस कौन का उत्तर सानी में भी नहीं है. सो इस पर ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है.

नववर्ष मंगलमय हो और आपकी अपेक्षाएँ मूर्त हों.
सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 28, 2014 at 8:08pm

आदरणीय हरिबल्लभ शर्मा सर , नववर्ष के स्वागत में सुन्दर कामनायें ,इस बेहतरीन  प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by Hari Prakash Dubey on December 28, 2014 at 7:40pm

"आदरणीय हरिबल्लभ शर्मा जी, सुन्दर कामनायें ,सुन्दर रचना ,हार्दिक बधाई !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 28, 2014 at 6:47pm

आदरणीय हरि वल्लभ  भाई  बहुत सुन्दर , नये साल की सुन्दर शुभकामनाओं के लिये आपका आभार , रचना के लिये बधाई , और मेरी ओर से भी नव वर्ष की मंगल कामनायें स्वीकार करें ।

Comment by ram shiromani pathak on December 28, 2014 at 6:41pm
वाह ज़ोरदार ग़ज़ल आदरणीय।।हार्दिक बधाई आपको

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 28, 2014 at 6:35pm

नव साल में नव चाहत को सजोये यह ग़ज़ल अच्छी बन पड़ी है, बहुत बहुत बधाई आदरणीय हरिबल्लभ शर्मा जी, शिज्जू भाई का इस्लाह काबिले गौर है .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 28, 2014 at 6:13pm

वाह आदरणीय हरिवल्लभ शर्मा सर बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है सारे अशआर पसंद आये बस महरबां शब्द का जो वज्न आपने लिया है उसमें थोड़ा संशय है। क्योँकि महरबां या मेहरबाँ का वज्न 212 होता है।

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