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ग़ज़ल --२१२२--२१२२--२१२ समझा चलो

२१२२--२१२२--२१२

आपके किरदार को समझा चलो

नाग की फुफकार को समझा चलो

 

हार कर संसार से हर दौड़ में

वक़्त की रफ़्तार को समझा चलो

 

मोल कुछ पाया नहीं अख़्लाक़ का

ख़ुद ग़रज़ बाज़ार को समझा चलो

 

कहता है कोई शिफ़ा मेरी नहीं

वो मेरे आज़ार को समझा चलो

 

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो

 

दोस्त था लेकिन अदू से जा मिला

मैं भी इक अय्यार को समझा चलो

 

ख़ामोशी इनकार भी इक़रार भी 

वो मेरे इज़हार को समझा चलो

 

आजकल गाता है वो रोता नहीं

दर्द की झंकार को समझा चलो

 

देखकर इक दीप को ‘खुरशीद’ भी

तीरगी के भार को समझा चलो

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 14, 2015 at 11:43pm

बढ़िया ग़ज़ल हुई है आ० खुर्शीद खैरादी जी 

Comment by umesh katara on January 14, 2015 at 8:04am

उम्दा गजल कही है सर वाह

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 13, 2015 at 2:05pm
उम्दा गजल आदरणीय
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 13, 2015 at 11:14am

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो.........अति उत्तम

आदरणीय भाई खुरशीद जी, पूरी गज़ल के लिये हार्दिक बधाई l

Comment by ajay sharma on January 12, 2015 at 11:02pm

ik sampurna gazal ke liye dhnyawad 

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 12, 2015 at 10:02pm
आजकल गाता है वो रोता नहीं
दर्द की झंकार को समझा चलो
वाह ! बधाई आदरणीय खुर्शीद खैराड़ी जी , सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 12, 2015 at 9:16pm

सर गँवा कर भी बचा ली आबरू

क़ीमती दस्तार को समझा चलो

देखकर इक दीप को ‘खुरशीद’ भी

तीरगी के भार को समझा चलो       --------- बहुत बढिया गज़ल हुई है , इन दो अश आर के लिये और गज़ल के लिये बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Shyam Narain Verma on January 12, 2015 at 5:19pm

" बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें । "

Comment by Hari Prakash Dubey on January 12, 2015 at 5:13pm

मोल कुछ पाया नहीं अख़्लाक़ का

ख़ुद ग़रज़ बाज़ार को समझा चलो

कहता है कोई शिफ़ा मेरी नहीं

वो मेरे आज़ार को समझा चलो शानदार ....आदरणीय खुरशीद जी  , पूरी गज़ल के लिये आपको हार्दिक बधाई !

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 12, 2015 at 3:52pm

खुर्शीद भाई

आपके किरदार को समझा चलो

नाग की फुफकार को समझा चलो------ शुरू से ही रंग जमा दिया भाई i

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