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ग़ज़ल-झील सा शीतल चाँद से सुन्दर लिख्खा है |

झील सा शीतल चाँद से सुन्दर लिख्खा है
हमने जो देखा है मंज़र लिख्खा है

अबजद हव्वज़ का भी जिन को इल्म नहीं
दुनिया ने उन को भी सुख़नवर लिख्खा है

आज उसी पर फूल वफ़ा के खिलते हैं
तुमने जिस धरती को बंजर लिख्खा है

पढ़कर देखो मेरी इन तहरीरों को
तुमको ही उन्वान बनाकर लिख्खा है

कुछ लोगों ने दौर-ए-ख़िज़ाँ के बारे में
कमरे में फूलों को सजाकर लिख्खा है

हमने बग़ावत करके सारी दुनिया से
महरूमी का नाम सिकन्दर लिख्खा है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by umesh katara on February 22, 2015 at 4:34pm

वाह वाह जनाब

Comment by दिनेश कुमार on February 21, 2015 at 10:17pm
उच्च कोटि की शायरी है आदरणीय समर कबीर सर जी। हर एक शेर अपने आप में मुकम्मल ग़ज़ल है। वाह वाह वाह
Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 9:53pm
आली जनाब डा.विजय शंकर जी,आदाब,हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 9:51pm
जनाब महर्षि त्रिपाठी जी,आदाब,बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 9:48pm
आली जनाब डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,आदाब ,हौसला अफ़ज़ाई के लिये बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 9:44pm
जनाब मिथिलेश वामनकर जी,आदाब अर्ज़ करता हूँ,ज़र्रा नवाज़ी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया |
Comment by Samar kabeer on February 21, 2015 at 9:40pm
जनाब श्याम नारायण वर्मा जी,आदाब,तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ |
Comment by Dr. Vijai Shanker on February 21, 2015 at 6:49pm
हमने बग़ावत करके सारी दुनिया से
महरूमी का नाम सिकन्दर लिख्खा है ।
वाह, बहुत सुन्दर, बधाई, आदरणीय समर कबीर जी, सादर।
Comment by maharshi tripathi on February 21, 2015 at 4:35pm

अच्छी गजल पर मेरी बधाई स्वीकार करें आ.समर कबीर जी |

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 21, 2015 at 4:28pm

samar kabeer saaheb makte ke liye sau baar salaam . vaah--- kya khoob kahaa hai .

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