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जनमत जिसके साथ में, उसकी होती जीत,

अहंकार जिसने किया, जनता करे न प्रीत |

जनता करे न प्रीत, जीत न उसे मिल पाए

जो भी चाहे जीत, काम जनता के आए

कह लक्ष्मण कविराय, मिटावे दिल से नफरत

जनहित की हो सोच, उसे ही मिलता जनमत |

 

दिल में भाव अभाव है,कोरा है वह चित्र 

दुख में कभी न छोड़ता,वह है सच्चा मित्र |

वह है सच्चा मित्र, श्रेय न कभी वह लेता

कपट धूर्तता बैर, पास न फटकने देता

लक्ष्मण देती साथ,ह्रदय से पत्नी इसमें

रहे भाव परमार्थ,लोभ न रखे जो दिल में ||

 

आटा गीला हो रहा, सूझे नहीं निदान,

दीन हीन इन्सान का, मन्दी में नुकसान

मन्दी में नुकसान, झेलता आया प्राणी

करे कौन सहयोग,सुने न दीन की वाणी

जिसमे डाले हाथ, उसी में होता घाटा

जिसके नहीं नसीब,मिले न उसको आटा ||

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 3, 2015 at 10:19am

बहुत बहुत आभार आपका श्री गिरिराज भंडारी जी | आपकी प्रकाशित पुस्तक में गजलें पढकर ख़ुशी है |आपको हार्दिक बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 3, 2015 at 10:17am

कुण्डलिया छंद आपको सुंदर लगे यह मेरे लिए प्रसन्नता के बात है | आपका अतिशय आभार श्री हरी प्रसाद दुबे जी और डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव  जी | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 3, 2015 at 10:15am

कुण्डलिया  छंदों पर आपकी प्रतिक्रिया पढकर प्रसन्नता हुई श्री अरुण कुमार निगम जी | 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 3, 2015 at 10:13am

कुण्डलिया छंद सराहने के लिए शुक्रिया श्री खुर्शीद खैराडी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 2, 2015 at 8:19pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर, सभी कुण्डलिया बहुत सुन्दर हुई हैं, हार्दिक बधाई निवेदित है. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 2, 2015 at 5:43pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , बढ़िया कुंडलियों की रचना की है , बधाई स्वीकार करें ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 2, 2015 at 2:13pm

आ 0 लड़ीवाला जी

क्रमशः अच्छी होती गयी हैं कुण्डलिया i आपको बधाई i  सादर i

Comment by Hari Prakash Dubey on March 2, 2015 at 1:37pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर , सभी कुण्डलिया छन्द बहुत सुन्दर हैं , हार्दिक बधाई ! सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 2, 2015 at 12:26pm

अंतिम छंद पसंद करने के लिए शुक्रिया  श्री उमेश कटारा  जी  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 2, 2015 at 11:23am

छंद पसंद कर सराहने के लिए बहुत बहुत आभार आपका श्री maharshi tripathi जी 

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