For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गीत - होली कैसे खेलूँ

मैं होली कैसे खेलूँ रे
साँवरिया तोरे संग
बादल अपनी पिचकारी से
रंग भंग कर जाते हैं
रखा गुलाल धुंध उड़ती है
राग जंग कर जाते हैं
कोई रोको इस धरती की
हरियाली हो गई तंग
मैं होली कैसे .............. ।
सूरज ने आँखें ना खोलीं
सिमटा उसका ताप
तारों की झिलमिल रंगोली
गायब अपने आप
कहीं सिमट बैठे हैं सारे
रंग बिरंगे रंग
मैं होली कैसे खेलूँ रे
साँवरिया तोरे संग ।

पूनम शुक्ला
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 649

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 4, 2015 at 3:59pm

इस आश्वस्तिकारी प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया.
गीत मनभावन है. वैसे मुखड़े के माध्यम से उभरे प्रश्न के इंगित अंतरे में होते तो गीत और प्रासंगिक हो सकता था. आगे, गीति-काव्य के प्रतिमानों को भी देखते समझते रहें.
इस प्रयास के आलोक में आपसे अपेक्षाएँ बढ़ी हैं.
शुभ-शुभ

Comment by Pari M Shlok on March 4, 2015 at 1:46pm
हार्दिक बधाई आदरणीया पूनम जी..सुन्दर रचना

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 3, 2015 at 8:58pm

होली के विभिन्न प्रतीकों के माध्यम से सुन्दर भावाभिव्यक्ति हेतु हार्दिक बधाई आदरणीया पूनम जी 

Comment by somesh kumar on March 3, 2015 at 7:51pm

बेमौसम की बरसात से होली में आए व्यवधान को इंगित करती और मन की खिन्नता की अभिव्यक्त करती एक सुंदर कोशिश 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 3, 2015 at 7:17pm

पूनम जी

सुन्दर रचना i

सूरज ने आँखें ना खोलीं
सिमटा उसका ताप
तारों की झिलमिल रंगोली
गायब अपने आप
कहीं सिमट बैठे हैं सारे
रंग बिरंगे रंग

Comment by maharshi tripathi on March 3, 2015 at 4:29pm

अच्छी ,,भावपूर्ण कविता हेतु आपको सादर बधाई आ.पूनम जी |

Comment by Hari Prakash Dubey on March 3, 2015 at 2:06pm

आदरणीया पूनम शुक्ला जी , सुन्दर रचना पर हार्दिक बधाई आपको ! सादर 

Comment by Shyam Narain Verma on March 3, 2015 at 1:23pm
भावो  से ओत प्रोत इस रचना के लिए  हार्दिक धन्यवाद i 
होली की शुभ कामनाएँ

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
9 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
15 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service