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ग़ज़ल - कुछ तो उसने कभी कहा होगा -पूनम शुक्ला

2122 1212 22
ऐसे कैसे कोई मरा होगा
कुछ तो उसने कभी कहा होगा
जब भी देखा जो आइना उसने
खुद से कह कर वो थक गया होगा
कितनी रातें गुजार दी होंगी
जाने कब तक वो जागता होगा
आँसू भी जब नहीं रहे साथी
मौत का साथ चुन लिया होगा
कितनी हैरत में जिन्दगी होगी
जब किसी ने नहीं सुना होगा
ख़ाक उड़ती है अब हवा में क्यों
जब कि घर लापता हुआ होगा
रूहे तामीर आज रोती है
जिसका कोई न अब पता होगा

पूनम शुक्ला

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 502

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 28, 2015 at 5:26pm

पूरी ग़ज़ल में मतला एकदम से ध्यान खींचता है, आदरणीया पूनमजी.

आपकी यह ग़ज़ल आपके प्रति आश्वस्त कर रही है. दिली दाद कुबूल कीजिये..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 28, 2015 at 8:53am

बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है ...पूर्ण रूप से भावाभिव्यक्ति है ..
बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 27, 2015 at 8:06pm

ववाह लाजवाब .

Comment by narendrasinh chauhan on April 27, 2015 at 6:01pm

खूब सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 27, 2015 at 3:11pm
इस सुन्दर ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई आदरणीया पूनम जी।

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