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ग़ज़ल - सूरज से आँख उसने मिलाई हुई तो है -- गिरिराज भंडारी

221    212 1   1221     212 

 

बदली ने टांग अपनी अड़ाई हुई तो है

सूरज से आँख उसने मिलाई हुई तो है

 

कहने लगे हैं नक़्श हरिक शक्ल के यही

चक्की में ज़िन्दगी  की पिसाई हुई तो है

 

बातों में तेवरी है बग़ावत की, मान ली

लेकिन जो सच थी बात, उठाई  हुई तो है

 

देखें कि घर में रोशनी आती है कब तलक

तारीकियों के संग लड़ाई हुई तो है  

 

सद शुक्र, ऐ तबीब दवा और मत लगा

उनकी हथेलियों से सिकाई हुई तो है

 

माना कि, फौज आज खड़ी सरहदों पे , पर

दुश्मन के साथ थोड़ी ढिलाई हुई तो है

 

हिलता नहीं जो संगे ग़रीबी तो क्या ग़लत

सरकार खुद पसीना  नहाई हुई तो है

****************************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

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Comment

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 12, 2015 at 9:34am

आदरणीय राम अवध भाई , हौसला अफज़ाई का दिली शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 12, 2015 at 9:33am

आ. उमेश भाई , बहुत शुक्रिया ।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on April 10, 2015 at 10:02pm

अच्छी गजल बधाई काफिया निर्वाहन के लिये

Comment by umesh katara on April 10, 2015 at 8:42pm

वाह वाह 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2015 at 11:23pm

आदरणीय सौरभ भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हृद से आभारी हूँ ॥

आँखे और आँ ख पर अगल अलग प्रतिक्रियाओं से संशय की स्थिति बन गई  थी ,  व्याकरण की गुथ्थी सुलझाने के लिये आपका बहुत शुक्रिया ,  जैसे आपने कहा है,  सुधार कर लूँगा ॥ आपका पुनः आभार ॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 9, 2015 at 11:03pm

आदरणीय गिरिराज भाईसाहब, क्या-क्या कमाल करते रहते हैं !
दिल से दाद कुबूल कीजिये.

अलबत्ता मतले के सानी में थोड़ा तब्दीली कर मिसरे यों बनाना चाह रहा हूँ -
सूरज से उसने आँख मिलायी हुई तो है
यानी,
बदली ने टांग अपनी अड़ाई हुई तो है
सूरज से उसने आँख मिलायी हुई तो है

आदरणीय समर कबीर साहब का सुझाव सही है. आँखें की जगह आँख ही रखें. इसके दो फ़ायदे हैं.
एक, आँख शब्द पूरे आँख ’कौम’ (?) यानी (आँखों) की नुमाइन्दग़ी करता हुआ होगा. अतः यह एकवचन संज्ञा (आँख) ही बहुवचन का द्योतक होगी.
दो, भाषा के व्याकरण के अनुसार कर्ता (संज्ञा) के साथ कारक की विभक्ति ने आ जाय तो वाक्य की क्रिया कर्म के अनुसार होगी. जैसे राम ने रोटी खायी. यहाँ राम जबकि पुल्लिंग है किन्तु रोटी स्त्रीलिंग है और राम के साथ ने आने से क्रिया स्त्रीलिंग पर आधारित होगी.

सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 9, 2015 at 9:21pm

माफ़ कीजिये शिज्जू भैया मुझे भी  आ० समर जी की बात सही लग रही है यहाँ है आँखों के लिए ही प्रयोग हुआ है इसलिए यहाँ बहुवचन का ही प्रयोग होगा अर्थात हैं होना चाहिए .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on April 9, 2015 at 7:36pm

आदरणीय गिरिराज सर बहुत सुंदर मानीखेज ग़ज़ल है सादर बधाई आपको। 

माजरत के साथ, जनाब समर कबीर साहब मैं ये कहना चाहूँगा

सूरज से आँखें उसने मिलाई हुई तो है  यहाँ आँखें तो बहुवचन है लेकिन मिलाने वाला तो एक ही शख्स है तो आँखें होने के बावजूद यहाँ हैं नहीं बल्कि है होना चाहिये। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2015 at 7:18pm

आदरणीय समर भाई , आपभी बड़े कठोर निकले , फैसला मुझ नौसीखिये पर छोड़ दिया । अगर ऐसा है तो मै आपके मिसरे को चुन रहा हूँ  ।  और यही सुधार कर लूँगा ॥ आपका बहुत शुक्रिया ॥

Comment by Samar kabeer on April 9, 2015 at 6:48pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी,आदाब,आप ने नक़ूश लिखा था उस हिसाब से मैने नक़्श कर दिया,नक़्शा यानी मानचित्र और नक़्श यानी निशान,फ़ैसला तो हुज़ूर आप ही को करना है |

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