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मुझे अच्छा लगा ....इंतज़ार

तेरी चाहत में
सारी उम्र गलाना अच्छा लगा !
ना पा कर भी
तुझे चाहना अच्छा लगा ! 
लिख लिख के अशआर
तुझे सुनाना अच्छा लगा !
सच कहूँ तो मुझे
ये जीने का बहाना अच्छा लगा !! 


दुप्पट्टा खिसका कर 
चाँद की झलक दिखाना अच्छा लगा !
पास से निकली तो
हलके से मुड़ के तेरा मुस्कुराना अच्छा लगा !
बदली से निकल कर आज
चाँद का सामने आना अच्छा लगा !!


मिलने नहीं आयी मगर
रात सपनों में तेरा आना अच्छा लगा !
ला इलाज ही सही मगर
प्रेम का ये रोग लगाना अच्छा लगा !
तनहा हूँ मगर मुझे
इस तरहां दिल को जलाना अच्छा लगा !! 

**************************************************

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 683

Comment

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Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on May 28, 2015 at 9:41am

सच कहूँ तो मुझे ये जीने का बहाना अच्छा लगा !! वाह..बहुत सुन्दर!!

इस बीच में obo पर कम आ सका इस बीच कई रचनाए छूट गयी!आपकी कमेन्ट के माध्यम से रचना पर आ सका!

मुहब्बत का रंग लिए अल्हड़ सी रचना पर हार्दिक बधाई आदरणीय 'इंतजार' सर!

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on May 28, 2015 at 9:01am

आ : ...आप सब का बहुत आभारी हूँ आप की उपस्तिथि और प्रसंशा के लिये ...बहुत दिन के बाद आ पाया हूँ मंच पर इसलिए काफी देर से आप का धन्यवाद कर रहा हूँ .......सादर 

Comment by Madan Mohan saxena on May 20, 2015 at 2:44pm

तेरी चाहत में
सारी उम्र गलाना अच्छा लगा !
ना पा कर भी
तुझे चाहना अच्छा लगा !
लिख लिख के अशआर
तुझे सुनाना अच्छा लगा !
सच कहूँ तो मुझे
ये जीने का बहाना अच्छा लगा !!

अति सुन्दर भाव। हार्दिक बधाई।

Comment by vijay nikore on May 20, 2015 at 4:11am

 अति सुन्दर भाव। हार्दिक बधाई।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 20, 2015 at 12:03am

वाह! आदरणीय मोहन जी, बहुत सुंदर प्रस्तुति. हार्दिक बधाई

Comment by shree suneel on May 19, 2015 at 11:08pm
.. और आपका ये सब बेलौस कह जाना मुझे अच्छा लगा.
आपको आपकी इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए बधाईयाँ आदरणीय.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 19, 2015 at 10:44pm

सांसारिक प्रेम की अपनी एक अलग ही दुनिया होती है.... 

मनभावन भाव पिरोती अभिव्यक्ति पर बधाई आ० मोहन सेठी जी 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 19, 2015 at 4:14pm

आपका यूँ  शरूर में आना अच्छा लगा.

Comment by Tanuja Upreti on May 19, 2015 at 10:04am

सुन्दर प्रस्तुति 

Comment by Hari Prakash Dubey on May 18, 2015 at 10:29pm

तनहा हूँ मगर मुझे
इस तरहां दिल को जलाना अच्छा लगा !! ......बहुत   सुन्दर  रचना   आ. मोहन  सेठी   जी   !  बधाई  ,सादर   

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