For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अक्षम्य कर्म (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी

"अक्षम्य कर्म"- (लघुकथा)

पड़ोसन के लिए बहुत ही जिज्ञासा का विषय था कि सामने वाले मकान से कल की तरह आज रात को भी ज़ोर से रोने की आवाज़ें क्यों आ रहीं थीं। खिड़की से झांक कर देखा तो पाया खन्ना साहब की पत्नी प्रियंका ही रो रही थी।

साहस जुटाते हुए , उनके घर जाकर जब उसने प्रियंका से वज़ह पूछी तो मुश्किल से उसने कहा- "मेरे पिताजी ने मायके आने के लिए सख़्ती से मना कर दिया है! पति ने मुझसे किनारा कर लिया है। सास देवरानी के यहाँ चली गई हैं ! सब मुझे ही कोस रहे हैं!"

"लेकिन क्यों? तुमसे ऐसा क्या हुआ?"- उमा ने पूछा।

"कुछ दिन पहले सास से झगड़ा हो गया था, जब उन्होंने मेरे लिए कुछ ग़लत शब्द बोले, तो आपा खोकर मैंने उन्हें दो थप्पड़ मार दिए थे!"

" फिर तो, सच में, तुमको रोने की बहुत ज़रूरत है।"

पड़ोसन उल्टे पैर तुरंत अपने घर लौट आई।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 584

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rahila on February 10, 2016 at 3:09pm
बहुत ही शानदार रचना आदरणीय उस्मानी जी!बात जुबान की थी जुबान दराजी बेशक कुबूल की जा सकती थी लेकिन इस रिश्ते में ऐसे कृत की कोई माफी नहीं । बहुत बेहतरीन, बहुत बधाई । सादर

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 10, 2016 at 12:10am

क्या ग़ज़ब की घटना है ! कर्म तो वाकई अक्षम्य था प्रियंका का. प्रस्तुति के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 28, 2016 at 12:11am

आदरणीय उस्मानी जी, बहुत खूब. हार्दिक बधाई 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 27, 2016 at 8:52pm

लघुकथा के रूप में बहुत अच्छी प्रस्तुति है, पर क्रोध में आपा  खोने से अफ़सोस के सिवा क्या हासिल हो सकता है?

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 27, 2016 at 10:30am
वाह.... तारीफ़, सबक़ व हौसला अफ़ज़ाई के संगम वाली टिप्पणी करने के लिए तहे दिल बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता राय जी।
Comment by kanta roy on January 27, 2016 at 9:27am

वाह !!! लघुकथा अपनी लघुता के सौंदर्य को परिभाषित करती हुई ,घटना को बिना किसी छदम व् काल्पनिक आवरण के लिबास में लपेटे हुए ,
ऐसे वाक्यातों के बाद की परिस्थितियां व् समाज के मनोविज्ञान का वास्तविक का चित्रण यथार्थ और बिलकुल सहज़ता से ब सार्थक सन्देश रोपित किये है। इतनी कसी हुई लघुकथा देखकर मन दंग -दंग हो उठा।

न एक शब्द अधिक न ही एक शब्द कम।
इस शानदार ,मुग्ध करती लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करे आदरणीय शहज़ाद जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 26, 2016 at 11:41pm
सादर बहुत बहुत हार्दिक धन्यवाद प्रोत्साहित करने के लिए जनाब समर कबीर साहब व जनाब तेज वीर सिंह साहब। मेरी नज़र में //अक्षम्य कर्म// से मतलब है- ऐसा कर्म/हरकत जिसकी कोई माफ़ी/क्षमा मान्य नहीं है। कोई त्रुटि हो तो कृपया मार्गदर्शन दीजिएगा।
Comment by TEJ VEER SINGH on January 26, 2016 at 7:03pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी!बहुत शानदार  प्रस्तुति!

Comment by Samar kabeer on January 26, 2016 at 5:48pm
जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,आपकी लघुकथा हमेशा की तरह शानदार है,ढेरों बधाई स्वीकार करें !

"अक्षम्य कर्म"का अर्थ बताएं प्लीज़ !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service