For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िंदगी को छलने लगी .....

ज़िंदगी को छलने लगी .....

गज़ब हुआ
एक चराग़ सहर से
शब की चुगली कर बैठा
एक लिबास
अपने ग़म की
तारीकियों से दरयाफ़्त कर बैठा
कोई करीबियों से
फासलों की बात कर बैठा

मैंने तो
तमाम रातों के चांद
उस पर कुर्बान कर दिए थे
अपने ग़मग़ीन पैरहन पर
हंसी के पैबंद सिल दिए थे
अपनी आंखों के हमबिस्तर को
मैं चश्मे साहिल पे ढूंढती रहा
नसीमे सहर से
उसका पता पूछती रही

उम्मीदों की दहलीज़
नाउम्मीदी की दीवारों से
बंद होने लगी
सांसें ज़िस्म को
बैसाखियों सी लगनी लगी
जिसको हयात समझी थी
वो बन के क़बा मौत की
ज़िंदगी को छलने लगी


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 416

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on July 3, 2016 at 1:21pm

अादरणीय डॉ. गोपाल जी भाई साहिब प्रस्तुति मेंं निहित भावों को समर्थन देती अापकी अात्मीय स्नेहाशीष का तहे दिल से शुक्रिया। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 2, 2016 at 8:56pm

बहुत खूबसूरत आ० सरना जी मैंने तो
तमाम रातों के चांद
उस पर कुर्बान कर दिए थे
अपने ग़मग़ीन पैरहन पर
हंसी के पैबंद सिल दिए थे
अपनी आंखों के हमबिस्तर को
मैं चश्मे साहिल पे ढूंढती रहा
नसीमे सहर से
उसका पता पूछती रही

Comment by Sushil Sarna on July 1, 2016 at 8:04pm

अादरणीया राजेश कुमारी जी प्रस्तुति मे निहित भावों को सहमति देती अापकी अात्मीय प्रशंसा एवं सुझाव का हार्दिक अाभार। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 1, 2016 at 6:39pm

मैंने तो 
तमाम रातों के चांद 
उस पर कुर्बान कर दिए थे 
अपने ग़मग़ीन पैरहन पर 
हंसी के पैबंद सिल दिए थे 
अपनी आंखों के हमबिस्तर को 
मैं चश्मे साहिल पे ढूंढती रहा 
नसीमे सहर से 
उसका पता पूछती रही--वाह्ह्ह्ह  वाह्ह्ह्ह 

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति लाजबाब आद० सुशील सरना जी ढेरों बधाई लीजिये 

बैसाखियों सी लगनी लगी ---बैसाखियाँ सी लगने  लगी  --कर  लीजिये 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service