For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रार्थना(ग़ज़ल) -रामबली गुप्ता

वह्र= 221 1221 1221 122

हे! ईश! हे' जगदीश! दया मान व बल दो।
हो शीश पे' आशीष हमें ज्ञान-विमल दो।

कर दूर सभी द्वेष मलिन-भाव हृदय से।
प्रभु! काट तमस-बंध हृदय-ज्योति धवल दो।।

सुर-साज नया ताल नया राग नया रव।
प्रभु! छंद-नया गान-मृदुल कंठ-नवल दो।।

प्रभु! ध्यान रहो नित्य व अधरों पे' हमारे।
निज भक्ति-भरे भाव के' नव गीत-ग़ज़ल दो।।

हिय-बाग में' नित पुष्प खिलें रंग-बिरंगे।
प्रभु! उर के' सरोवर में' नया नेह-कमल दो।।

दारिद्र सभी दुःख-कलुष-भेद मिटा प्रभु!
सुख-शांति सुखद ठाँव व आनंद के' पल दो।।

मद आँधियों' का तोड़ सभी विघ्न मिटाएं।
तन-मन में' सहन-शक्ति प्रभो! धैर्य-अटल दो।।

प्रभु! राष्ट्र के' रक्षार्थ न पग पीछे' रखें हम।
भय ताप से' अरि पाएं' हृदय मे वो' अनल दो।।

रचना-रामबली गुप्ता
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 885

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by रामबली गुप्ता on August 15, 2016 at 5:28pm
सादर आभार आद0 ब्रजेश कुमार जी
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 15, 2016 at 4:24pm

वाह आदरणीय बहुत ही सुन्दर सरस गीतिका का अवतरण हुआ है आपकी लेखनी द्धारा हार्दिक बधाई संग नमन 

Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:38pm
बहुत बहुत आभार आद0 सतविंदर जी
Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:35pm
आद0 गोपाल नारायन जी रचना आपको अच्छी लगी मेरा लिखना सार्थक हुआ।हार्दिक आभार आपको
Comment by रामबली गुप्ता on August 13, 2016 at 5:34pm
कल्पना जी सराहना के लिए बहुत बहुत आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 13, 2016 at 12:54pm
सुन्दरम् आदरणीय रामबली गुप्ता जी सादर हार्दिक बधाई।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 13, 2016 at 12:54pm
सुन्दरम् आदरणीय राम बली गुप्ता जी।हार्दिक बधाई
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 13, 2016 at 11:35am

आ० रामबली जी , आपको बधाई  क्योंकि यह हिन्दी भाषा की गजल लगती है . मैं ऐसी ही गजले हिन्दी में पसंद करता हूँ . सादर .

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 12, 2016 at 5:32pm
बहुत अच्छी रचना हुई है आदरणीय बधाई स्वीकारें ।
Comment by रामबली गुप्ता on August 11, 2016 at 10:41pm
हृदय से आभार आद0 समर भाई जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
16 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service