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बलात्कार पर कर रहे मोदी बिल को पेश ।
दलित नही महिला अगर होगा हल्का केस ।।

ब्लात्कार में भेद कर तोड़ा है विश्वास ।
अच्छे दिन अब लद गए टूटी सबकी आस ।।

कितना सस्ता ढूढ़ता कुर्सी का वह मन्त्र ।
मोबाइल के दाम में बिक जाता जनतन्त्र ।।

सड़को पर इज्जत लुटे मथुरा भी हैरान ।
न्याय बदायूं मांगता सब उनके शैतान ।।

नए सुशासन दौर में जनता है गमगीन ।
सौगातों में ला रहे वही सहाबुद्दीन ।।

छूटा गुंडा जेल से जिसका था अनुमान ।
जंगल राजा दे गया चिर परिचित फरमान ।।

न्याय पालिका मौन है , मौन हुई सरकार ।
अपराधी बेख़ौफ़ सब कैसा भ्र्ष्टाचार ।।

झाड़ू का विश्वास क्या गन्दा इसका कृत्य ।
व्यभिचारी को छोड़कर स्वजन बहारे नित्य ।।

काम वासना शत्रु सम वैरी सकल समाज ।
जो इनसे उन्मुक्त हो पावे जग का ताज ।।

नेह लुटाना विष हुआ जाति पाति के देश ।
आरक्षण के नाम पर नेता बदले भेष ।।

--- नवीन मणि त्रिपाठी

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Comment by Ashok Kumar Raktale on September 13, 2016 at 2:11pm

वाह ! आज की सरकारों पर सुंदर दोहे रचे हैं.बहुत-बहुत बधाई. बाकी आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी ने कह ही दिया है.सादर.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 11, 2016 at 4:02pm

आ० नवीन जी

बलात्कार पर कर रहे मोदी बिल को पेश-------- मात्रा की दृष्टि से बलत्कार और बलात्कार की मात्रा एक ही है किन्तु बलात्कार करने से दोहे की गेयता बाधित होती है . सुकवि होने के लिए यह छोटी छोटी बाते भी महत्वपूर्ण हैं . मसलन - तुक देखिये --- पेश -केस , हैरान-शैतान ,कृत्य -नित्य,  देश -भेष --- ये तुक निम्न कोटि के हैं  उच्च कोटि के तुक ऐसे होते - पेश -वेश , हैरान -वीरान , कृत्य -भृत्य , देश- वेश -----दोहे का कथ्य सुन्दर है . आदरणीय

Comment by Samar kabeer on September 11, 2016 at 3:55pm
जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सभी दोहे अच्छे हुए हैं,दिल से बधाई स्वीकार करें ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 11, 2016 at 3:31pm

आदरणीय नवीन भाई , वर्तमान पर कहे आपके सभी दोहे बहुत अच्छे हुये हैं , हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on September 10, 2016 at 3:40pm
विशेष आभार आ0 बृजेश जी ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 10, 2016 at 10:35am

उत्तम सार्थक दोहे 

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