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देखिये साहिब मेरा तो घर शिवाला हो गया (ग़ज़ल 'राज ')

२१२२ २१२२ २१२२ २१२

मेरी बगिया खिल उठी मौसम निराला हो गया

आ गई  बेटी मेरे घर में उजाला हो गया

 

दीप खुशियों के जले शुभ शंख मानो बज उठे

देखिये साहिब मेरा तो घर शिवाला हो गया

 

लहलहाई यूँ फसल खेतों की मेरी देखिये

सोने चाँदी से मढ़ा इक इक निवाला हो गया 

 

बिन सुरा सागर के जैसे खाली था मेरा वजूद   

आते ही उसके लबालब ये पियाला  हो गया

 

पढ़ते पढ़ते रात दिन आँखें मेरी थकती नहीं

उसका चेह्रा खूबसूरत इक रिसाला हो गया

 

छोड़ बाबुल की गली को एक दिन वो जायेगी

सोचकर मेरे अभी से दिल पे छाला हो गया

 

उसकी जानिब गर बुरी आँखें उठें तो खींच ले 

ऐसा कातिल अब मेरी आँखों में जाला हो गया

---------------मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by रामबली गुप्ता on October 25, 2016 at 12:55am
वाह वाह बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है आदरणीया राजेश कुमारी जी दिल से बधाई लीजिये।
Comment by vijay nikore on October 24, 2016 at 3:26pm

 बहुत ही खूबसूरत एहसास। बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2016 at 9:34pm

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से बहुत बहुत आभार आपका |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2016 at 9:33pm

मोहतरम जनाब तस्दीक जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से शुक्रिया |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2016 at 9:32pm

बृजेश कुमार जी ,आपको ग़ज़ल पसंद आई आपका तहे दिल से शुक्रिया |

Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 23, 2016 at 8:04pm
वाह आदरणीया राजेश कुमारी जी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही है। शेर दर शेर दाद कबूल करें।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 23, 2016 at 7:44pm

 मोहतरमा राजेश कुमारी    साहिबा ,  बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल हुई है दाद के साथ  मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं --

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 23, 2016 at 7:31pm
क्या खूबसूरती से अहसासों को पिरोया है...बहुत ही खूबसूरत..हार्दिक बधाइयां आदरणीया

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 23, 2016 at 7:18pm

आद० समर भाई जी ,ग़ज़ल को आपका आशीष मिल गया और क्या चाहिए आपकी प्रतिक्रिया ने उत्साह दुगुना कर दिया |भोपाल के एक बड़े शायर डॉ० कमर अली शाह ने मेरी ये ग़ज़ल  मंगवाई है उन्होंने इतनी दाद दी थी की शब्द नहीं हैं मेरे पास ,वो आपको भी जानते हैं |

आपका दिल से बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी | 

Comment by Samar kabeer on October 23, 2016 at 2:50pm
बहना राजेश कुमारी जी आदाब,बहुत उम्दा और मुरस्सा ग़ज़ल कही आपने,हर शैर बढ़िया हुआ है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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