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सब क़ुबूल अब तो बेवफा के सिवा (तरही गजल)

बह्र 2122 1212 22

ज़िन्दगी क्या है इक खता के सिवा
कुछ करो यार कल्पना के सिवा ||

सोचता हूँ ग़ज़ल कहूँ कैसे
जानकारी न काफ़िया के सिवा||

जो भी चाहो कहो मुझे यारो
सब क़ुबूल अब तो बेवफा के सिवा ||

अब समझना मुझे नही आसाँ
कोई समझे न दिलरुबा के सिवा ||

तुम कभी रूठ जाते हो मुझसे
बात बनती न इल्तिज़ा के सिवा||

आज भी मुल्क में गरीबी है
क्या मिला हमको योजना के सिवा||

दर सभी आजमा लिए हमने
*कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा* ||

ज़िंदगी क्या है और कुछ भी नहीं
एक खुशरंग कल्पना के सिवा ||

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:30am
आदरणीय बहन राजेश कुमारी जी सादर अभिवादन, गजल पर हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on January 19, 2017 at 3:28am
आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, गजल पर हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 18, 2017 at 10:26pm
आद०  सुरेन्द्र नाथ सिंह भैया ,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद स्वीकारें ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 17, 2017 at 10:50pm
बड़ी उम्दा ग़ज़ल हुई..बधाइयाँ

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 17, 2017 at 9:24pm

आ. सुरेन्द्र भाई , अच्छी गज़ल हुई है , हार्दिक बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 17, 2017 at 12:19pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी,बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है,शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद कुबूल फरमाएं. सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on January 17, 2017 at 4:06am
आद0 मोहम्मद आरिफ जी आदाब, गजल पसन्द करने और हौसला अफजाई के लिए आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on January 17, 2017 at 4:05am
आदरणीय समर साहब सादार प्रणाम, गजल पर आपकी पसन्द और अनुमोदन दोनों शकुन देता है, बहुत बहुत आभार आपका।
Comment by Mohammed Arif on January 16, 2017 at 4:41pm
आदरणीय सुरेंद्र नाथजी, आदाब ! बेहतरीन ग़ज़ल , मुबारक़बाद ।
Comment by Samar kabeer on January 16, 2017 at 4:10pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

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