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सुंदर है हर रचना
रवि! बड़े परेशान लग रहे हो -क्या बात है"-रवि के जिगरी दोस्त अनिल ने बड़े ही सहज भाव से पूछा। "कुछ नहीं- बस यूँ ही" प्रत्यूतर में रवि ने कहा।"अरे!कुछ तो होगा ....तभी तो..."अनिल ने रवि ने वास्तविक कारण जानने के उद्देश्य से दुबारा पूंछा।"भाई जी-बस यूँ ही-अपनी नयी रचनाओं को लेकर परेशान था,अथक प्रयास के बाद भी रचनाओ में वो सुंदरता नहीं दिख पा रही है, जो सुंदरता के मानदंडों पर खरी उतर सके"अनिल को अपनी परेशानी से अवगत कराते हुए रवि न जवाब दिया।कुछ देर गंभीरता के साथ सोचने के बाद बड़े ही सहज भाव से बोला-"भाई रवि, हर भाव सूंदर है , हर रचना सुंदर है।""ऐसा कैसे! " एक जिज्ञासु की तरह रवि ने जानने के भाव से कहा "वैसे ही जैसे हर कुरूप पत्थर के अंदर , हर सुन्दर से सूंदर मूरत के अंदर छिपी होती है दुनिया की सबसे खूब सूरत मूरत-पत्थर से जितना अनाबश्यक भाग हटता जायेगा मूर्ती उतनी ही सूंदर और परिष्कृत होती जायेगी-जरूरी है जरूरी है सधे हुये हाथों के साथ सतत शिल्पकारी के अभ्यास की"अनिल ने समझाते हुए कहा।चेहरे पर हताशा की जगह रवि के चेहरे पर खुशी और उसके हाथों में कलम फिर अपनी जगह सुनिश्चित कर चुकी थी।
मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Chandresh Kumar Chhatlani on March 6, 2017 at 10:52am

बहुत बढ़िया कथानक चुना है आपने रचना के लिए आदरणीय डॉ. आशुतोष मिश्रा जी सर, सादर बधाई स्वीकार करें| कृपया सुधीजनों के सुझावों पर गौर करें, भाषागत त्रुटियाँ जल्दी ठीक की जा सकती हैं, जैसे कहीं-कहीं सुंदर के स्थान पर सूंदर हो गया है, प्रत्युत्तर की बजाय प्रत्यूतर हो गया है| इसके अलावा अलग-अलग पंक्तियों में तोड़कर इसके पठन को आप और भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं| सादर, 

Comment by Mahendra Kumar on March 5, 2017 at 9:08pm

आपका हार्दिक आभार।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 5, 2017 at 8:48pm
आदरणीय महेंद्र जी आपकी इस बिस्तृत प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद आपके मार्गदर्शन पर अमल करते हुए आदरणीय योगराज सर के अभी तक के समस्त लेख और उससे जुडी प्रतिक्रियाएं और शंकाओ के समाधान पढ़ रहा था मन में उठे कई प्रश्नो का जवाब स्वतः ही मिल गया आपके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देने लौटा तो आप द्वारा शंका का निवारण भी मिल गया आदरणीय योगराज सर के वो सभी लेख पढ़कर आत्म ची तन कर रहा हूँ जबरदस्त तरीके से आइना दिखती हुयी धैर्य संयम और ज्यादा लिखने की चाह के घटती गुणवत्ता जैसे पहलू से नयी सोच मिली सर को भी प्रणाली
और आपको मार्ग प्रसस्त करने के लिए धन्यवाद सादर
Comment by Mahendra Kumar on March 5, 2017 at 6:45pm

आदरणीय आशुतोष जी, साहित्य सम्बन्धी मेरी अत्यल्प समझ के अनुसार आपकी यह रचना निश्चित ही लघुकथा की श्रेणी में आएगी। लघुकथा के विन्यास के सन्दर्भ में मैं उसकी तीन प्रमुख विशेषताओं को आपके समक्ष रखना चाहूँगा।

1. आकार (आ. योगराज सर में अनुसार एक आदर्श लघुकथा में शब्दों की संख्या लगभग तीन सौ शब्दों के आसपास होनी चाहिए।)

2. विस्तार (लघुकथा किसी क्षण विशेष से सम्बन्धित होती है इसलिए उसका विस्तार सीमित होता है। इसका उल्लंघन कालदोष को जन्म देता है। यदि एक से अधिक काल (दिन, महीने अथवा वर्ष) को लघुकथा में स्थान देना अपरिहार्य हो तो उसके लिए फ़्लैशबैक तकनीक का प्रयोग करना चाहिए।)

3. अन्त (लघुकथा के अन्त पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आ. योगराज सर के अनुसार लघुकथा की अन्तिम पंक्ति को पढ़कर ऐसा लगना चाहिए जैसे किसी ततैया ने डंक मार दिया हो। दूसरे शब्दों में, लघुकथा का अन्त चौंकाने वाला अथवा प्रभावी होना चाहिए।)

जो कुछ भी मैंने इस मंच और आ. योगराज सर से सीखा है उसे ही आपके समक्ष रखने की कोशिश की है। आशा है बात कुछ स्पष्ट हुई होगी। सादर।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 5, 2017 at 1:58pm
आदरणीय महेंद्रजी आपके मार्गदर्शन के अनुरूप आदरणीय सर के लेख पढूंगा मैं सिर्फ यह जानना चाहता था की ये रचना यदि लघु कथा नहीं है इसे किस श्रेणी में रखा जाए और इसमे ऐसी लय बात और छीनी थी जो इसे लघु कथा में तब्दील हो सके सादर
Comment by Mahendra Kumar on March 5, 2017 at 12:39pm
आदरणीय आशुतोष जी, ओबीओ पर उपलब्ध आदरणीय योगराज सर के लघुकथा सम्बन्धी सभी लेखों को पढ़ जाएँ। आपकी सभी शंकाओं का समाधान हो जाएगा। इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 4, 2017 at 11:45am

आदरणीय सुरेन्द्र जी आपकी प्रतिक्रिया से बहुत हौसला मिला .इस बिधा में जो सूक्ष्म फर्क है उससे आत्मसात नहीं कर पा रहा हूँ / यह रचना लघु कथा कहलायेगी कि नहीं यह संशय अभी भी बना हुआ है आदरणीय योगराज राज सर के दिए मशविरे से कालखंड और संक्षिप्त करने तक की बात को अमल में लाने की कोशित अभी कर पाया हूँ लेकिन तकनीकी पक्ष के सम्बन्ध में किसी बिद्वान के मशविरे का इंतज़ार कर रहा था ..प्रयास करता रहूँगा .प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद सादर 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 4, 2017 at 7:15am
आद0 आशुतोष मिश्र जी सादर अभिवादन। प्रयास बढ़िया है, यूँही लिखते रहें, मेरी कोटिश शुभकामनाये और बधाइयाँ। सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 1, 2017 at 6:17pm
आदरनीय आरिफ जी आपकी उत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद सादर
Comment by Mohammed Arif on March 1, 2017 at 5:36pm
आदरणीय आशुतोष जी आदाब, बेहतरीन प्रयास । बधाई स्वीकार करें ।

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