For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नारी ( सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' )

नारी तुम! सुकुमार कुमुदुनी
सौम्य स्नेह औ प्रेम प्रदाता ||
धरती पर हो शक्ति स्वरूपा
तुम रण चंडी भाग्य विधाता ||

संस्कारों की शाला तुम हो
तुम लक्ष्मी सावित्री सीता |
निर्वाहिनी सत्कर्म की तुम
तुम्ही वेद कुरान औ गीता ||

सह कर असह्य प्रसव वेदना
तुम लाल धरा पर लाती हो |
तुम हो धात्री अखिल जगत की
तुम्ही सृष्टि सृजन बढाती हो ||

हे रूपवती हे कमनीया
ईश्वर की तुम अद्भुत रचना ||
तलवार धरो जब कर में तो
मुश्किल है अरिदल का बचना ||

करुणा का हो सागर अथाह
तुम सकल प्रेम की परिभाषा |
तुम जीवन सँगिनी हो नर की
तुम शिशु ममत्व की अभिलाषा ||

तुम हो माता भगिनी भार्या
ईश्वर का हो वरदान तुम्ही |
घर आगन को रोशन करती
हो शुचिता की पहचान तुम्ही ||

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 857

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on March 16, 2017 at 4:31pm
आद0 महेंद्र कुमार जी सृजन को मान देकर हौसला अफजाई के लिए आभार
Comment by नाथ सोनांचली on March 16, 2017 at 4:29pm
आद0 डॉ आशुतोष मिश्र जी अदबी, हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया,
Comment by रामबली गुप्ता on March 15, 2017 at 6:01am
वाहहह बढियाँ रचना हुई है भाई सुरेन्द्रनाथ जी। बधाई स्वीकारें।सादर
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 8, 2017 at 10:19pm
वाह आदरणीय अनुपम उत्तम सृजन ..
Comment by Mahendra Kumar on March 8, 2017 at 9:32pm
नारी को समर्पित बहुत उम्दा रचना प्रस्तुत की है आपने आदरणीय सुरेन्द्र जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 8, 2017 at 7:15pm
आदरणीय सुरेन्द्रजी नारी के महत्व को इंगित करती शानदार रचना पर हार्दिक बधाई सादर
Comment by नाथ सोनांचली on March 8, 2017 at 4:16pm
आदरणीय उस्ताद समर कबीर साहिब सादर अभिवादन। आपने इस सृजन को सम्मान दिया, इस हौसला अफजाई के लिए हृदय की गहराईयो से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on March 8, 2017 at 4:15pm
आदरणीय वासुदेव शरण अग्रवाल जी अभिवादन। आपने इस सृजन को सम्मान दिया, इस हौसला अफजाई के लिए हृदय की गहराईयो से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on March 8, 2017 at 4:14pm
आदरणीय मोहम्मद आरिफ भाई सादर अभिवादन। आपने इस सृजन को सम्मान दिया, इस हौसला अफजाई के लिए हृदय की गहराईयो से आभार।
Comment by Samar kabeer on March 8, 2017 at 4:09pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,नारी को समर्पित अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
10 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
11 hours ago
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service