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तरही ग़ज़ल (कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें)

बह्र 2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी की राह मुश्किल हौसला रोशन करें
हर गली हर रास्ते पर हम दिया रोशन करें ||

ऐ ख़ुदा बर्कत की ख़ातिर भेज दे महमाँ कोई
अपने दस्तर ख़्वान पर हम ये दुआ रोशन करें ||

हुस्न वाले भी निखर जायेंगे मोती की तरह
गर नुमाइश छोड़ कर शर्म-ओ-हया रोशन करें ||

दूसरों से पूछना क्या हर कमी दिख जाएगी
आप अपने दिल का बस ये आइना रोशन करें ||

हैं यहाँ तनहाइयाँ और वक़्त की मजबूरियाँ
कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें ||

वक़्त जब विपरीत हो, जिंदा रखे बस धैर्य को
*इक दिया जब साथ छोड़े दूसरा रोशन करें ||*

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:35am
आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया।
Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:34am
आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:33am
आद0 कल्पना भट्ट जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए कोटिश आभार
Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:32am
आद0 भाई सतविंदर जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल में शिरकत कर हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:30am
आद0 गिरिराज भंडारी भाई जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:29am
आदरणीय समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपकी हौसला अफजाई के लिए सादर आभार।
Comment by Mahendra Kumar on May 17, 2017 at 9:21am

बढ़िया ग़ज़ल है आदरणीय सुरेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by vijay nikore on May 16, 2017 at 1:34pm

इस अच्छी गज़ल के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 15, 2017 at 10:30pm
Is behtreen gazal ke liye hardik badhayi adarniya Surendra ji
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 15, 2017 at 5:56pm
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी उम्दा अशआर हुए हैं,दिली मुबारकबाद कबूल कीजिए!

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