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शाइरी भी यार अब हम क्या करें

बह्र 2122 2122 212

हर जगह नफरत का आलम, क्या करें
ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||

मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ
और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||

जो सहारे भाग्य के बैठा रहे
ऐसे का फिर राम गौतम क्या करें ||

कुछ नही अपना यहाँ यह जानकर
*जाने वाले चीज का ग़म क्या करें*

वक़्त से कोई बड़ा जब है नही
सर किसी के सामने ख़म क्या करें ||

इस हुनर पर हावी हैं मजबूरियाँ
शाइरी भी यार अब हम क्या करें ||

दोस्त भी बदले जो कपड़ों की तरह
आँख उसके वास्ते नम क्या करें ||

रोज़ जो मेहमाँ बने घर पर मिरे
यार उसका ख़ैरमक़दम क्या करें ||

हैं जुबाँ जिनकी सियासत की तरह
'नाथ' उनपर अब यकीं हम क्या करें ||

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sushil Sarna on April 25, 2017 at 5:35pm

हर जगह नफरत का आलम, क्या करें
ज़ह्र होता ही नही कम क्या करें ||

मौत का सामान ख़ुद इंसाँ हुआ
और जुबाँ उसकी हुई बम क्या करें ||

वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी इस ग़ज़ल में बहुत ही दिलकश और हकीकी अशआर कहे हैं आपने ... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई कबूल फरमाएं।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on April 20, 2017 at 4:14pm
आदर सुरेन्द्र भाई जी,उम्दा गजल कही है आपने। शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें!
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 5:39am
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपके हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 5:33am
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम, आपके हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार
Comment by नाथ सोनांचली on April 20, 2017 at 3:51am
आद0 श्रध्येय रवि शुक्ल सर सादर प्रणाम, हौसला अफजाई के लिए आभार।
Comment by Samar kabeer on April 18, 2017 at 6:13pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Ravi Shukla on April 18, 2017 at 2:30pm

आदरणीय सुरेन्‍द्र जी अच्‍छी गजल कही  आपने बधाई स्‍वीकार करें

Comment by नाथ सोनांचली on April 18, 2017 at 2:14pm
भाई मोहम्मद आरिफ जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय तल से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on April 18, 2017 at 2:13pm
आदरणीय भाई नीलेश जी सादर अभिवादन, हौसला अफजाई के लिए हृदय से आभार,निश्चय ही आगे से कुछ बेहतर सोचूँगा
Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 18, 2017 at 11:42am

बहुत खूब ग़ज़ल के लाइट बधाई स्वीकार करें ....
आगामी अभ्यास के रूप में अब   हर मिसरे को पूरा कसने का प्रयास कीजिये ...
बधाई 
सादर 

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