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ग़ज़ल नूर की-मैं पहले-पहल शौक़ से लाया गया दिल में

22 11 22 11 22 11 22
.
मैं पहले-पहल शौक़ से लाया गया दिल में
फ़िर नाज़ से कुछ रोज़ बसाया गया दिल में.
.
वो ख़त तो बहुत बाद में शोलों का हुआ था,
तिल तिल के उसे पहले जलाया गया दिल में.
.
हालाँकि मुहब्बत वो मुकम्मल न हो पाई 
शिद्दत से बहुत जिस को निभाया गया दिल में.
.
अंजाम पता है हमें कुछ और है फिर भी,  
हीरो को हिरोइन से मिलाया गया दिल में.   
.
हम सच में तेरी राह में कलियाँ क्या बिछाते
पलकों को मगर सच में बिछाया गया दिल में.  
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 1009

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Comment by नाथ सोनांचली on May 19, 2017 at 3:57am
हालाँकि मुहब्बत वो मुकम्मल न हो पाई
शिद्दत से बहुत जिस को निभाया गया दिल में.

वाह भाई वाह, उम्दा । इस शेर पर मेरी अतिरिक्त तालियाँ
आद0 नीलेश भाई सादर अभिवादन, उम्दा गजल के लिए बधाई स्वीकारें।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 18, 2017 at 8:20pm
हमेशा की तरह बहुत ही शानदार ग़ज़ल हुई आदरणीय..
मैं पहले-पहल शौक़ से लाया गया दिल में
फ़िर नाज़ से कुछ रोज़ बसाया गया दिल में.
.
वो ख़त तो बहुत बाद में शोलों का हुआ था,
तिल तिल के उसे पहले जलाया गया दिल में...बेहतरीन हैं
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2017 at 9:35pm

शुक्रिया आ. सतविन्द्र जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2017 at 9:35pm

शुक्रिया आ. समर सर.. और छूट गया टाइपिंग में ... अभी लिख देता हूँ 
सादर 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2017 at 9:34pm

शुक्रिया आ. रवि जी 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 17, 2017 at 7:55pm
आदरणीय नीलेश नूर जी,उम्दा अशआर हुए हैं,सादर हार्दिक बधाई
Comment by Samar kabeer on May 17, 2017 at 3:16pm
जनाब निलेश'नूर'साहिब आदाब,हमेशा की तरह कसी हुई शानदार ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

'अंजाम पता है हमें कुछ है फिर भी'
इस मिसरे में एक शब्द लिखने से रह गया है,शायद 'और'होगा,देखियेगा ।
Comment by Ravi Shukla on May 17, 2017 at 12:40pm

आदरणीय नीलेश जी बहुत बहुत बधाई इस बेहतरीन गजल के लिये

वो ख़त तो बहुत बाद में शोलों का हुआ था,
तिल तिल के उसे पहले जलाया गया दिल में. ये श्‍ोर खास पसंद आया  पुन: बधाई

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2017 at 8:59am

शुक्रिया आ. गिरिराज जी...

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2017 at 8:59am

शुक्रिया आ. मोहम्मद आरिफ साहब 

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