For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

'अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो'

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

१२१२ ११२२ १२१२ २२/११२


ख़ुलूस-ओ-प्यार की उनसे उमीद कैसे हो
जो चाहते हैं कि नफ़रत शदीद कैसे हो

छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

हमेशा घेर कर कुछ लोग बैठे रहते हैं
अदब पे आपसे गुफ़्त-ओ-शुनीद कैसे हो

इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो
----
शदीद-सख़्त
क़ल्ब-दिल
कलीद्-चाबी
कशीद्-खींचना
गुफ़्त-ओ-शुनीद-बात चीत
पलीद-गन्दा,ग़लीज़
समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 788

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by narendrasinh chauhan on July 15, 2017 at 4:19pm

लाजवाब रचना 

Comment by Samar kabeer on July 14, 2017 at 10:08pm
जनाब लक्ष्मण धामी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 14, 2017 at 2:04pm
आ. भाई समर जी,बेहतरीन गजल हुई है ।हार्दिक बधाई ।
Comment by Gurpreet Singh on July 14, 2017 at 9:21am
जी सर शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:08pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,'उमीद'को 121 भी ले सकते हैं और 'उम्मीद'221 भी ले सकते हैं ।
सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:04pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on July 13, 2017 at 10:02pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Gurpreet Singh on July 13, 2017 at 9:30pm
वाह आदरणीय समर सर जी..बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने..
सर जी उमीद(121) को क्या उम्मीद(221)की तरह भी लिया जा सकता है या नहीं.
Comment by Sushil Sarna on July 13, 2017 at 5:28pm

बुझे बुझे से दरीचे हैं ख़ुश्क आँखों के
शराब इश्क़ की इनसे कशीद् कैसे हो

वाह आदरणीय समर कबीर साहिब मज़ा आ गया .... दिल से बधाई स्वीकार करें इस शानदार ग़ज़ल के लिए।

Comment by Mohammed Arif on July 13, 2017 at 12:56pm
छुपा रखे हैं कई राज़ तुमने सीने में
तुम्हारे क़ल्ब की हासिल कलीद् कैसे हो। वाह!वाह!!
इसी जतन में लगे हैं हज़ारहा शाइर
अदब की मुल्क में मिट्टी पलीद कैसे हो । आज के शाइरों को पर अच्छा तंज़ है ।
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब,एक और धमाकेदार ग़ज़ल की सौग़ात । हर शे'र बेजोड़ है । शे'र दर शे'र दाद के साथ दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

ताप संताप दोहे :

ताप संताप दोहे :सूरज अपने ताप का, देख जरा संताप। हरियाली को दे दिया, जैसे तूने शाप।।भानु रशिम कर…See More
4 hours ago
Naveen Mani Tripathi posted a blog post

ग़ज़ल

2122 2122 212हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।हो मुहब्बत का यहां पर श्री…See More
12 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"vijay nikore साहेब बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए | "
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

-ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टार-

ट्विंकल ट्विंकल लिट्ल स्टारबंद करो ये अत्याचारनज़रो में वहशत है पसरीजीना बच्चों का दुश्वारशहर नया हर…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

औरत.....

औरत.....जाने कितने चेहरे रखती है मुस्कराहट थक गई है दर्द के पैबंद सीते सीते ज़िंदगी हर रात कोई…See More
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बहुत खूब अच्छि गज़ल  हुई ।बधाई"
yesterday
Pradeep Devisharan Bhatt shared Naveen Mani Tripathi's blog post on Facebook
yesterday
vijay nikore commented on बृजेश नीरज's blog post धारा
"रचना अच्छी लगी, बधाई बृजेश जी"
yesterday
vijay nikore commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post किस तरह होते फ़ना प्यार निभाने के लिए (४६ )
"गज़ल अच्छी लिखी है। बधाई गिरधारी सिंह जी"
yesterday
vijay nikore commented on Hariom Shrivastava's blog post कुण्डलिया छंद-
"हरि ओम जी, छ्न्द अच्छे लगे। बधाई।"
yesterday
Sonia is now a member of Open Books Online
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सूर्यास्त के बाद

निर्जन समुद्र तटरहस्यमय सागर सपाट अपारउछल-उछलकर मानो कोई भेद खोलतीबार-बार टूट-टूट पड़ती लहरें…See More
yesterday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service