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रह गए हम -ग़ज़ल- बसंत कुमार शर्मा

मापनी 2122  2122 212

 

दूर से  नजरें  मिलाते  रह गए हम  

पास उनके आते’ आते रह गए हम

 

कान  पर जूं  तक न रेंगी साहिबों के,

हक़ की खातिर गिड़गिड़ाते रह गए हम   

 

तल्खियाँ हर बात में उनकी रहीं हैं,

प्यार की धुन गुनगुनाते रह गए हम

 

माल लेकर चल दिये वो तो वहाँ से,

स्टेज पर फोटो खिंचाते रह गए हम

 

फुर्र हो कर आसमानों में उड़े वो,

धूल धक्कड़ में नहाते रह गए हम

 

जब मिला मौका उन्होंने दाँव खेले,

प्यार के रिश्ते निभाते रह गये हम

 

इन मकानों का करें तो अब करें क्या,

स्वप्न घर का बस सजाते रह गए हम

 "मौलिक एवं अप्रकाशित "

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 1:23pm

आदरणीय   laxman dhami जी, हौसलाफजाई  के लिए  आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 1, 2017 at 11:52am

हार्दिक बधाई स्वीकारें।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:08am

आदरणीय Gurpreet Singh जी, हौसलाफजाई  के लिए  आपका दिल से शुक्रिया 

आपने सही पकड़ा, मापनी गलत लिख गई है 

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ है ,इसी तरह स्नेह बनाये रखिये सादर 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:08am

जी आदरणीय Samar kabeer जी मैंने संज्ञान ले लिया है , हौसला अफजाई के लिए दिल शुक्रिया आपका 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:07am

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar  जी, हौसलाफजाई  के लिए  आपका दिल से शुक्रिया 

आपने सही पकड़ा, मापनी गलत लिख गई है 

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ है ,इसी तरह स्नेह बनाये रखिये सादर 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:05am

 आदरणीय khursheed khairadi  जी, हौसलाफजाई  के लिए  आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:05am

 आदरणीय Mohammed Arif  जी, हौसलाफजाई  के लिए  आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 1, 2017 at 10:03am

आदरणीय Shyam Narain Verma जी हौसला अफजाई के लिए आपका दिल से शुक्रिया 

Comment by Gurpreet Singh jammu on August 1, 2017 at 9:22am

आदरणीय बसंत कुमार जी,, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है,, ऊपर मापनी आपने गलत लिख दी है,,, आपने 2122  2122 212 लिखा है जबकि ग़ज़ल 2122 2122 2122 पर है,

Comment by Samar kabeer on July 31, 2017 at 6:33pm
जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।
जनाब निलेश साहिब की बातों पर ध्यान दें ।

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