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ग़ज़ल नूर की - हैरान क्या करेगा कोई मोजज़ा मुझे

२२१/ २१२१/ १२२१/ २१२

हैरान क्या करेगा कोई मोजज़ा मुझे,
दुनिया का हर तमाशा लगे ख़्वाब सा मुझे.
.
हालाँकि ख़ुशबू इल्म-ओ-अदब की नहीं हूँ मैं,
लेकिन बिख़रने का है बहुत तज़रिबा मुझे.
.
इक रोज़ मैं ही तेरे किसी काम आऊँगा,
गरचे तू मानता ही नहीं काम का मुझे.
.
तेरे कहे पे चल पड़ा हूँ आँखें मूँदकर
ठोकर लगे तो मौला मेरे थामना मुझे.
.
ये कौन मेरे हिज्र को करता है और तवील,
जीने की फिर ये कौन दुआ दे गया मुझे.
.
आकर मिज़ाज-पुरसी किया कर मेरी कभी
तुझ से ख़फ़ा हूँ ज़िन्दगी, समझा बुझा मुझे.
.
पूँजी हूँ उम्र भर की तो मुझ को सँजो के रख
खैरात लग रहा हूँ तो सब पर लुटा मुझे.
.
तुम रहनुमाओं वाले हो तुम क़ाफ़िला बनों
मंज़िल दिखा रही है सही रास्ता मुझे.
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 1271

Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 8, 2018 at 9:01pm

शुक्रिया आ. संतोष दादा 

Comment by santosh khirwadkar on September 15, 2017 at 6:03pm
वह्ह्ह्ह क्या बात है ,ख़ूबसूरत ग़ज़ल !!! आदरणीय निलेश जी ,शे'र दर शे'र बधाई स्वीकारें!!
Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 15, 2017 at 5:44pm

शुक्रिया आ. दिनेश जी ..

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 15, 2017 at 5:43pm

शुक्रिया आ. रवि जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 15, 2017 at 5:43pm

शुक्रिया आ. तस्दीक़ अहमद साहब 

Comment by Ravi Shukla on August 6, 2017 at 12:57pm

आदरणीय नीलेश जी बहुत अच्छी ग़ज़ल आपने कही शेर दर शेर मुबारकबाद कुबूल करें इस पर हुई चर्चा को पढ़कर भी अच्छा लगा

Comment by दिनेश कुमार on August 4, 2017 at 10:41pm
बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई आ. निलेश सर जी। वाह वाह वाह।
क्या कहने हैं।

एक मिसरे पर
Doubt हो गया है।
.
ये कौन मेरे हिज्र को करता है और तवील,
.
'और' को 2 ke wazn पर बाँधा है आपने। सभी बाँधते भी hain. jab 'और' ko तथा के अर्थ में लेते हैं तब इसे जल्दी में 'अर' पढ़कर 2 के वज़्न पर बाँध लेते हैं।
लेकिन यहाँ 'और' का अर्थ extra/ज़्यादा है। तब जल्दी में पढ़ कर क्या वही अर्थ निकलेगा। सादर।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on August 4, 2017 at 4:56pm
मुहतरम जनाब नीलेश नूर साहिब,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें। मतले के उला मिसरे को यूं भो कर सकते हैं ---हैरां कोई करिश्मा नहीं कर सका मुझे । सादर
Comment by Nilesh Shevgaonkar on August 4, 2017 at 11:13am
शुक्रिया आ सुरेन्द्रनाथ जी
Comment by Nilesh Shevgaonkar on August 4, 2017 at 11:13am
आ डॉ साहब,
शुक्रिया।
तवील में अंतिम 1 मात्रा छूट के तहत बढ़ा ली है। हर बहर में यह छूट होती है।
मोजज़ा चमत्कार को कहते हैं जिस पर समर सर का रिजर्वेशन है कि यह सदियों में होता है अतः इस शब्द को इस तरह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये।
सादर

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