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ग़ज़ल - जो तेरे इश्क़ की खुमारी है,

जो तेरे इश्क़ की खुमारी है,

हमने तो रूह में उतारी है,

दर्द पलकों से टूट बिखरा है,

इन दिनों ग़म से मेरी यारी है,

तू मेरी सांस में उतर आया,

इश्क़ है या कोई बीमारी है ,

तू निगाहों में या कि दिल में रहे,

मेरी मुझसे ही जंग जारी है,

वस्ल के नाम नींद को रख कर,

हमने शब आँख में गुजारी है !!अनुश्री!!

मौलिक व् अप्रकाशित

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Comment by Anita Maurya on October 25, 2017 at 7:25pm

Samar kabeer  साहब, अभी अभी शेर कहने की शुरुवात की है, आप सब का साथ और हौसला रहा तो बेहतर कह पाऊँगी .. 

Comment by Anita Maurya on October 25, 2017 at 7:20pm

Ravi Shukla जी इतनी महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आपका बहुत बहुत आभार ... 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 22, 2017 at 8:25pm
अच्छी ग़ज़ल कहने हुई है आदरणीया..बधाई
Comment by Ravi Shukla on August 22, 2017 at 5:38pm

आदरणीय अनिता जी आपकी शायद पहली गजल से रू ब रू हो रहे है गजल के लिये मुबारक बाद हाजिर है । दूसरे शेर मे शायद तकाबुले रदीफ भी है ।

Comment by Samar kabeer on August 21, 2017 at 6:57pm
मोहतरमा अनीता मौर्य जी आदाब,शिल्प कुछ कमज़ोर है, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा हुआ है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
तीसरे शैर में 'बीमारी'क़ाफ़िया नहीं चलेगा,देखियेगा।
इस मंच पर ग़ज़ल के साथ अरकान लिखने का नियम है,जो आपने नहीं लिखे आगे से ख़याल रखियेगा ।
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 20, 2017 at 9:18pm
बहुत खूब ..हार्दिक बधाई ।
Comment by नाथ सोनांचली on August 18, 2017 at 6:46pm
आद0 अनिता मौर्या जी सादर अभिवादन, खूबसूरत ग़ज़ल पर दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर
Comment by narendrasinh chauhan on August 18, 2017 at 2:57pm

सुन्दर रचना 

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