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प्रकाश को काटते नभोचुम्बी पहाड़

अब हुआ अब हुआ अँधेरा-आसमान ...

अनउगा दिन हो यहाँ, या हो अनहुई रात

किसी भी समय स्नेह की आत्मा की दरगाह

दीवारों के सुराख़ों में से बुलाती है मुझको

और मैं आदतन चला आता हूँ तत्पर यहाँ

पर आते ही आमने-सामने सुनता हूँ आवाज़ें

इस नए निज-सर्जित अकल्पनीय एकान्त में

अनबूझी नई वास्तविकताओं के फ़लसफ़ों में

और ऐसे में अपना ही सामना नहीं कर पाता

झट किसी दु:स्वप्न से जागी, भागती, हाँफती

लौट आती है भीषण वेदना पूछने दु:खांत प्रश्न

प्रकाश को काटते  गूंगे अवाक खड़े  पहाड़ से

भीतर फिर से फैल रहे  तनाव के आसमान से 

प्रलय...

चुप है नभोचुम्बी पहाड़

चुप है गंभीर अँधेरा-आसमान

           ----------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on August 31, 2017 at 7:18pm

रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय फूल सिहं जी।

Comment by PHOOL SINGH on August 31, 2017 at 4:07pm

बेहतरीन रचना

Comment by vijay nikore on August 28, 2017 at 2:04pm

//अपने अन्तेर्मन के द्वन्द को खुले गगन के नीचे दिन और रात के बीच , सुंदर और आकर्षित बिम्बों का इस्तमाल किया है//

इस सुन्दर भाव से मेरा मनोबल बढ़ाने के लिए हार्दिक आभार, आदरणीया कल्पना जी।

Comment by vijay nikore on August 27, 2017 at 5:16pm

रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय मित्र नरेन्द्रसिंह जी।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on August 27, 2017 at 4:46pm

अपने अन्तेर्मन के द्वन्द को खुले गगन के नीचे दिन और रात के बीच , सुंदर और आकर्षित बिम्बों का इस्तमाल किया है आदरणीय | बहुत सुंदर रचना हुई है | हार्दिक बधाई आपको |

Comment by narendrasinh chauhan on August 26, 2017 at 5:23pm

शानदार रचना 

Comment by vijay nikore on August 24, 2017 at 11:59pm

 रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय मित्र शेख शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 24, 2017 at 7:08pm
आत्मा जिनकी मृतप्राय हो गई है, तनाव के आसमान जहां हैं... आत्मावलोकन की जहां ज़रूरत है... ! विचारोत्तेजक व चिंतन मनन करने को प्रेरित करती बेहतरीन रचना के लिए सादर हार्दिक बधाई आदरणीय विजय निकोल जी।
Comment by vijay nikore on August 24, 2017 at 5:13pm

रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय मित्र गिरिराज जी ।

Comment by vijay nikore on August 24, 2017 at 5:12pm

रचना की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, आदरणीय मित्र तस्दीक जी ।

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