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गीत... हर आहट पर यूँ लगता है जैसे हों साजन आये-बृजेश कुमार 'ब्रज'

हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये

घिर घिर आये कारे बादल
वैरी कोयल कूक उठी
अरमानों ने अंगड़ाई ली
और करेजे हूक उठी
बागों बीच पपीहा बोले
अमुआ डाली बौराये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये

खिड़की पर मायूसी पसरी
दरवाजों ने आह भरी
आँगन ज्यूँ शमशान हुआ है
कोने कोने डाह भरी
कब तक साँस दिलासा देगी
कब तक पायल भरमाये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये

फिर दिल ने आवाज लगाई
गौर करो इस अर्जी पर
कितने अरमानों से बुन बुन
उर की बंजर धरती पर
मैंने कितने गीत चुने हैं
कितने अफसाने गाये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये

तुम बिन सारा जग बिसराया
बस इतनी सी बात हुई
दिन कट जाता जैसे तैसे
वैरन काली रात हुई
मैं बिरहन बिरहा की मारी
कौन मुझे अब समझाये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 1464

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Comment by Sushil Sarna on November 3, 2017 at 7:44pm

तुम बिन सारा जग बिसराया
बस इतनी सी बात हुई
दिन कट जाता जैसे तैसे
वैरन काली रात हुई
मैं बिरहन बिरहा की मारी
कौन मुझे अब समझाये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये
बहुत खूब आदरणीय बृजेश जी ... प्रेम,विरह,स्मृति ,सब भावों का सुंदर गीत जो दिल में दूर तक असर करता है। कोमल भाषा और गीत प्रवाह पाठक को अंत तक बांधे रखता है। इस उत्तम गीत की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 3, 2017 at 5:59pm

वाह! बहुत खूबसूरत गीत 

पर एक जगह मात्र कम रह गयी और बोया आया का तुकांत भी सही नहीं इसे फिर से साधने का प्रयास हो 

भाव और बिम्ब सुन्दर है 

हार्सिक बधाई 

Comment by नादिर ख़ान on November 3, 2017 at 4:40pm

खिड़की पर मायूसी पसरी
दरवाजों ने आह भरी
आँगन ज्यूँ शमशान हुआ है
कोने कोने डाह भरी
कब तक साँस दिलासा देगी
कब तक पायल भरमाये
हर आहट पर यूँ लगता है
जैसे हों साजन आये ...आदरणीय बृजेश जी सुंदर गीत के लिए मुबारकबाद आपको ... 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 3, 2017 at 11:58am

सुंदर भावों के गीत के लिए हार्दिक बधाई श्री ब्रजेश कुमार जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 3, 2017 at 9:25am

आद० बृजेश कुमार जी बहुत सुंदर गीत लिखा है आपने बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by Mohammed Arif on November 3, 2017 at 8:03am
आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब, सरल-सरस भाषा में बहुत ही अच्छे विरह गीत की प्रस्तुति । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 3, 2017 at 7:33am
आदरणीय अजय शर्मा जी आपका हार्दिक स्वागत है..
Comment by Ajay Kumar Sharma on November 2, 2017 at 9:46pm
बहुत सुन्दर..

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