For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

(1) बचे न जीव
ख़त्म होते जंगल
है अमंगल ।
(2) सूखी धरती
बरसे न बादल
गायब जल ।
(3) भारतवर्ष
संस्कृतियों की गंगा
मन है चंगा ।
(4) आओ बनाएँ
खुशहाल भारत
है ज़रूरत ।
(5) रक्षा नायक
राष्ट्र का रखवाला
सेना नायक ।
(6) जातीय भेद
देश का नुकसान
घटाए शान ।
मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Views: 721

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohammed Arif on November 20, 2017 at 6:19pm
आदरणीय वासुदेव जी आदाब,
हाइकु को अपनी प्रतिक्रिया से पोषित करने का बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on November 20, 2017 at 6:16pm
आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी आदाब,
हाइकु को अपनी प्रतिक्रिया से पोषित करने का बहुत-बहुत आभार ।
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 20, 2017 at 3:27pm

अनुपम हाइकु के लिए बधाई श्री आरिफ मोहम्मद साहब

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on November 20, 2017 at 8:27am
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब ,सीख देते हुए उम्दा हाइकु हुए हैं ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Mohammed Arif on November 20, 2017 at 8:21am
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,
हाइकु पर अपनी प्रतिक्रिया से मान बढ़ाने का बहुत-बहुत शुक्रिया ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 18, 2017 at 8:53pm
राष्ट्र को समर्पित बेहतरीन हाइकु सृजन के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब।
Comment by Mohammed Arif on November 16, 2017 at 5:31pm
बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब । आपकी नज़रे अनायत से लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Samar kabeer on November 16, 2017 at 5:19pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,बहुत उम्दा हाइकू लिखे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on November 16, 2017 at 2:11pm
आदरणीय सुशील सरना जी भावों को सम्मान देने का बहुत-बहुत शुक्रिया । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Sushil Sarna on November 16, 2017 at 11:57am

आदरणीय मो. आरिफ साहिब, बहुत की सुंदर और सार्थक हाईकू हुए हैं।  हार्दिक बधाई सर। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
1 hour ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
1 hour ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
1 hour ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
2 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
8 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service