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लघुकथा--रिटर्न गिफ़्ट

" सबसे पहले मैं आप सभी उपस्थित महानुभावों , परम मित्रों , परिजनों , रिश्तेदारों और मीडिया जगत के तमाम साथियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ । आप सभी ने मेरे छोटे से आग्रह पर उपस्थित होकर मेरा मान बढ़ाया । मैं कोई बहुत बड़ा आदमी नहीं हूँ । साधारण-सा , अदना-सा आपके बीच का आदमी हूँ । कई दिनों से बेचैनी में था । सोच रहा था अपने अट्ठावनवें जन्म दिन पर क्या रिटर्न गिफ्ट दूँ ? तो मैं आप सभी के समक्ष घोषणा करता हूँ आज के अपने अट्ठावनवें जन्म दिन पर रिटर्न गिफ्ट के तौर पर जीते जी अपनी एक किडनी दान करता हूँ ।" सभी उपस्थितगण आश्चर्यचकित रह गए । रमेश कुमार जी का इतना बड़ा दुस्साहस ! कमाल है ! सब एक दूसरे को देखने लगे । उन्होने आगे फिर कहा-" मेरी कुछ सामान्य और सात्विक शर्तें हैं । किडनी लेने वाला शाकाहारी हो, युवा हो , कोई नशा न करता हो , स्वयं मुझसे संपर्क करें , संस्था के मार्फत नहीं । "
उनके निर्णय से पुत्र और पुत्र-वधू भी अभिभूत थे ।

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

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Comment by Mohammed Arif on December 3, 2017 at 7:46am
लघुकथा पर अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देकर उसे सफल बनाने का बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।
Comment by राज लाली बटाला on December 2, 2017 at 9:07pm

बहुत ही सुन्दर लघुकथा...मुबारकबाद कुबूल करें

Comment by vijay nikore on December 2, 2017 at 1:33pm

नज़्म तो आप अच्छी लिखते ही थे, अब एक-के-बाद आपसे अच्छी लघु कथा भी पढ़ने को मिल रही है। इसके लिए हार्दिक बधाई, भाई मोहम्मद आरिफ़ जी।

Comment by Samar kabeer on December 2, 2017 at 11:45am
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,हमेशा की तरह एक अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on December 1, 2017 at 10:27pm
आदरणीया रक्षिता सिंह जी आदाब,
आपकी उत्साहजनक टिप्पणी से मेरा लेखन सार्थ क हो गया । बहुत-बहुत आभार आपका ।
Comment by Mohammed Arif on December 1, 2017 at 10:25pm
आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,
लघुकथा के अनुमोदन, सटीक और सारगर्भित टिप्पणी देने और उनके त्साहवर्धन का बहत-बहुत शुक्रिया ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 1, 2017 at 2:47pm
वाह। सकारात्मकता में कटाक्ष का बेहतरीन सम्मिश्रण। हार्दिक बधाई आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ साहिब। काश कोई ऐसा ज़रूरतमंद युवा चिराग़ लेकर ढूंढने पर मिल जाए! लेकिन यहां ढूंढने की नहीं, उसा युवा द्वारा ख़ुद डोनर के पास पहुंचने को कहा जा रहा है!!
Comment by रक्षिता सिंह on December 1, 2017 at 1:56pm
आदरणीय आरिफ जी,
बहुत ही सुन्दर लघुकथा...मुबारकबाद कुबूल करें।

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