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आहट की प्रतीक्षा में ...

आहट की प्रतीक्षा में ...

जाने
कितनी घटाओं को
अपने अंतस में समेटे
अँधेरे में
चुपचाप
बैठी रही

कौन था वो
जो कुछ देर पहले
देर तक
मेरे मन की
गहन कंदराओं में
अपने स्वप्निल स्पर्शों से
मेरी भाव वीचियों को
सुवासित करता रहा
और
मैं
ऑंखें बंद करने का
उपक्रम करती हुई
उसके स्पर्शों के आग़ोश में
मौन अन्धकार का
आवरण ओढ़े
चुपचाप
बैठी रही

आहटें
रूठ गयीं
स्पर्श
निष्पंद हो गये
पवन वेग से
वातायन के पट
शोर करने लगे
मैं
भ्रम की चादर पर
विश्वास के पैबंद लगाने लगी
वो आएगा
ज़रूर आएगा
आज नहीं तो कल आएगा
मैं
अपने काजल को
अंतस की घटाओं के
हवाले नहीं करूंगी
मैं
अपने अवसन्न अधरों पर
उसकी तृषा का वरण किये
तम से बतियाती
द्वार पर टकटकी लगाए
आहट की प्रतीक्षा में
चुपचाप
बैठी रही

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 848

Comment

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Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 7:36pm

आदरणीय Samar kabeer जी, सादर प्रणाम, सृजन के भावों अपनी ऊर्जावान प्रतिक्रिया से जीवंत करने का दिल से आभार।

Comment by Samar kabeer on February 3, 2018 at 7:02pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत सुंदर कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 6:00pm

आदरणीय विजय निकोर जी, सादर प्रणाम, सृजन के भावों अपनी ऊर्जावान प्रतिक्रिया से जीवंत करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 6:00pm

आदरणीय सुरेन्द्र नाथ जी सृजन को आत्मीय प्रशंसा से अलंकृत करने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 6:00pm

आदरणीय तस्दीक़ अहमद साहिब , आदाब , आपकी आत्मीय प्रशंसा से सृजन उपकृत हुआ। हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 6:00pm

आदरणीय नरेंद्र सिंह चौहान जी सृजन आपकी आत्मीय प्रशंसा का आभारी है।

Comment by Sushil Sarna on February 3, 2018 at 5:59pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार /

Comment by नाथ सोनांचली on February 3, 2018 at 12:57pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। आपकी कविताये सीधे दिल मे उतर जाती हैं। एकतरफ से पढ़ते जाओ और कथानक बुनते जाओ। ग़ज़ज़्ब। बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 3, 2018 at 12:15pm

जनाब सुशील सरना साहिब ,दिल की गहराई में उतरती सुन्दर कविता हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।

Comment by narendrasinh chauhan on February 3, 2018 at 11:09am
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