For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

डर लगता है दुनिया से

और घर वालों के तानों से,

और कभी डर जाती हूँ मैं

प्यार के इन अफसानों से।।

कितनी मुश्किल आती है

और कितने ही गम सहते हैं,

लाखों कोशिश कर लें-

फिर भी तन्हा ही हम रहते हैं।।

रहता कुछ भी याद नहीं 

जब याद किसी की आती है,

प्रेस से कपड़े जलते हैं-

काॅफी फीकी रह जाती है।।

माँ भी गुस्सा करती है

और बापू भी चिल्लाते हैं,

मगर किसी को इस दिल के

हालात समझ ना आते हैं।।

होती है जब रात सुकूँ से 

ये सारा जग सोता है,

सारी सारी रात जाग

मेरा दिल ख़्वाब संजोता है।।

कुछ पल बीते आँख लगी

माँ मुझे जगाने लगती है,

कितना सोयेगी...कह कह कर

शोर मचाने लगती है।।

दिन भर मुरझाया सा मन

फिर इक पल में खिल जाता है,

रौशन हो उठतीं आँखें-

जब कहीं नजर तू आता है।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 700

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by नाथ सोनांचली on February 7, 2018 at 7:16pm

आद0 रक्षिता सिंह जी सादर अभिवादन। बहुत ही बेहतरीन सृजन। भाव सम्प्रेषण उत्तम। बधाई आपको इस सृजन पर

Comment by Sushil Sarna on February 5, 2018 at 8:13pm

इस भावपूर्ण सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई आदरणीया।

Comment by SALIM RAZA REWA on February 5, 2018 at 7:43pm
आ. Rakshita जी.
बहुत खूबसूरत रचना हुई है मुबारक़बाद कुबूल फरमाएं.
Comment by narendrasinh chauhan on February 5, 2018 at 1:38pm
खुब सुन्दर रचना
Comment by रक्षिता सिंह on February 5, 2018 at 1:34pm

आदाब आदरणीय आरिफ जी  एवं तस्दीक जी,

सराहना के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। श्रीमान समर कबीर जी  के इस्लाह  को मद्दे नजर रखते हुए मैंने अपनी त्रुटियाँ सुधारली हैं।

Comment by Mohammed Arif on February 5, 2018 at 10:10am

आदरणीया रक्षिता जी आदाब,

                    छू लेने वाली रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब की इस्लाह पर गौर करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 5, 2018 at 9:32am

मुहतर्मा रक्षिता साहिबा , दिल की गहराइयों को छूती सुन्दर रचना हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं।

Comment by रक्षिता सिंह on February 5, 2018 at 8:52am

आदरणीय कबीर जी एवं मेरे समस्त  गुणीजन, 

 मार्गदर्शन व हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया... लेखन सार्थक हुआ।।

Comment by Samar kabeer on February 4, 2018 at 10:02pm

मोहतरमा रक्षिता सिंह जी आदाब,बहुत उम्दा रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

'कितनी मुश्किल आती हैं'

इस पंक्ति में 'मुश्किल'शब्द एक वचन है, इसलिये 'हैं' को "है" करना उचित होगा ।

20वीं पंक्ति में 'खआव' क्या है?,शायद आप "ख़्वाब"लिखना चाहती थीं?

Comment by narendrasinh chauhan on February 4, 2018 at 8:47pm
सुन्दर रचना

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
13 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service