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कभी पेट पर लेकर अपने, हमें सुलाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

छाया देते घने पेड़ सी, लड़ते वो तूफानों से

हो निष्कंटक राह हमारी, उनके ही बलिदानों से

विपरीत रहें हालात मगर, कभी नहीं घबराते हैं

ओढ़ हौसलों की चादर को, हँसते और हसाते हैं

हँसकर तूफानों से लड़ना, हमें सिखाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

बोझ लिए सारे घर का वो, दिन भर दौड़ लगाते हैं

हम सबके सपनो की खातिर, भूखे भी रह जाते हैं

गिरवी रखते पगड़ी अपनी, घर को कभी बचाने में

जूते घिस जाते हैं उनके, हमको योग्य बनाने में

खुद के कपड़े फ़टे हुए पर, हमें सजाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

लगते भले कठोर हमें पर, नाज़ुक दिल के होते हैं

दर्द कभी हमको होता तब, पापा दिल से रोते हैं

करें सामना डटकर कल का, यहीं हमें सिखलाते हैं

सही गलत क्या दुनिया में है, हमें सदा बतलाते हैं

गिरके उठना उठके चलना, सदा सिखाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

    (मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 12, 2018 at 5:33am

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 11, 2018 at 10:00pm

सुंदर गीत हुआ है हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 6:07am

आद0 तेजवीर जी सादर अभिवादन। आपकी रचना पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हृदय तल से आभार।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 5:51am

आद0 रक्षिता सिंह जी सादर अभिवादन। आपको लेखनी पसन्द आयी,लिखना सार्थक हुआ। आभार आपका

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 5:50am

आद0 पंकज कुमार मिश्र जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी गरिमामयी उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हृदय से आभार

Comment by TEJ VEER SINGH on February 9, 2018 at 9:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीयसुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी।बेहतरीन प्रस्तुति।

Comment by Rakshita Singh on February 8, 2018 at 11:01pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी, दिल को छू लेने बाली बहुत  ही बेहतरीन रचना।

पिता के व्यक्तित्व को बारीकियों से दर्शाती ये रचना बहुत ही सराहनीय है.....

हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on February 8, 2018 at 4:16pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी पिता प्रेक् ख़ूबरूगीत के लिए बहुत सारी बधाई

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 8, 2018 at 1:18pm

आद0 नरेंद्र सिंह चौहान जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका उत्साहवर्द्धन के लिए

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 8, 2018 at 1:17pm

आद0 सोमेश जी सादर अभिवादन। रचना पसन्द करने के लिए कोटिश आभार

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