For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कभी पेट पर लेकर अपने, हमें सुलाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

छाया देते घने पेड़ सी, लड़ते वो तूफानों से

हो निष्कंटक राह हमारी, उनके ही बलिदानों से

विपरीत रहें हालात मगर, कभी नहीं घबराते हैं

ओढ़ हौसलों की चादर को, हँसते और हसाते हैं

हँसकर तूफानों से लड़ना, हमें सिखाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

बोझ लिए सारे घर का वो, दिन भर दौड़ लगाते हैं

हम सबके सपनो की खातिर, भूखे भी रह जाते हैं

गिरवी रखते पगड़ी अपनी, घर को कभी बचाने में

जूते घिस जाते हैं उनके, हमको योग्य बनाने में

खुद के कपड़े फ़टे हुए पर, हमें सजाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

लगते भले कठोर हमें पर, नाज़ुक दिल के होते हैं

दर्द कभी हमको होता तब, पापा दिल से रोते हैं

करें सामना डटकर कल का, यहीं हमें सिखलाते हैं

सही गलत क्या दुनिया में है, हमें सदा बतलाते हैं

गिरके उठना उठके चलना, सदा सिखाते पापा जी

कभी बिठा काँधे पर हमको, खूब घुमाते पापा जी

    (मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 220

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 12, 2018 at 5:33am

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 11, 2018 at 10:00pm

सुंदर गीत हुआ है हार्दिक बधाई ।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 6:07am

आद0 तेजवीर जी सादर अभिवादन। आपकी रचना पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हृदय तल से आभार।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 5:51am

आद0 रक्षिता सिंह जी सादर अभिवादन। आपको लेखनी पसन्द आयी,लिखना सार्थक हुआ। आभार आपका

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 11, 2018 at 5:50am

आद0 पंकज कुमार मिश्र जी सादर अभिवादन। रचना पर आपकी गरिमामयी उपस्थिति और उत्साहवर्धन का हृदय से आभार

Comment by TEJ VEER SINGH on February 9, 2018 at 9:11pm

हार्दिक बधाई आदरणीयसुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी।बेहतरीन प्रस्तुति।

Comment by Rakshita Singh on February 8, 2018 at 11:01pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी, दिल को छू लेने बाली बहुत  ही बेहतरीन रचना।

पिता के व्यक्तित्व को बारीकियों से दर्शाती ये रचना बहुत ही सराहनीय है.....

हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on February 8, 2018 at 4:16pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी पिता प्रेक् ख़ूबरूगीत के लिए बहुत सारी बधाई

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 8, 2018 at 1:18pm

आद0 नरेंद्र सिंह चौहान जी सादर अभिवादन। बहुत बहुत आभार आपका उत्साहवर्द्धन के लिए

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on February 8, 2018 at 1:17pm

आद0 सोमेश जी सादर अभिवादन। रचना पसन्द करने के लिए कोटिश आभार

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

PHOOL SINGH commented on PHOOL SINGH's blog post हैरान हो जाता हूँ, जब कभी
""भाई ब्रिजेश" हौसलाअफजाई के लिए आपका कोटि कोटि धन्यवाद|"
39 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

आम चुनाव और समसामायिक संवाद (लघुकथाएं) :

(1).चेतना : ग़ुलामी ने आज़ादी से कहा, "मतदाता सो रहा है, उदासीन है या पार्टी-प्रत्याशी चयन संबंधी…See More
43 minutes ago
amod shrivastav (bindouri) posted a blog post

कोई तो दीद के क़ाबिल है आया

1222-1222-122श'हर  में शोर ये  फैला हुआ है ।। पडोसी गाँव में मुजरा हुआ है।।कोई तो दीद के…See More
45 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

अधूरी सी ज़िंदगी ....

अधूरी सी ज़िंदगी ....कुछ अधूरी सी रही ज़िंदगी कुछ प्यासी सी रही ज़िंदगी चलते रहे सीने से लगाए एक उदास…See More
45 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"सुधीजनों के प्रति हार्दिक आभार"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, लोकतंत्र की महत्ता पर सुंदर रचना हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
10 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"पुराने शाइरों में कई उस्ताद शाइरों ने इसका प्रयोग किया है,और ये उर्दू में क़तई ग़लत नहीं,हाँ हिन्दी…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय शैख़ शहजाद उस्मानी साहब सादर, मतदाओं के प्रकार बताते सुंदर छंद रचे हैं आपने. हार्दिक बधाई…"
10 hours ago
Satyanarayan Singh replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"नेता शायद भूल  गए हैं, अब विकास की बातें। होड़  मची है  सभी दलों में, देने…"
10 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"छन्न पकैया छन्न पकैया, आज करो इक वादा ।हारे जीते चाहे कोई, बची रहे…"
10 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 96 in the group चित्र से काव्य तक
"कर के जिनने भी प्रयोग किया है वे जाने अनजाने ग़लत ही हैं। अब किसी बड़े ने बेहद कमज़ोर-सी कोई बात कर दी…"
10 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service