मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन
ख़ुशियों का इस जहाँ में फ़ुक़दान हो न जाये
ग़म अपनी ज़िन्दगी का उन्वान हो न जाये
नफ़रत का आज कंकर जो तेरी आँख में है
इक रोज़ बढ़ते बढ़ते चट्टान हो न जाये
मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है
तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये
सारे अदू लगे हैं,यारो इसी जतन में
पूरा हमारे दिल का अरमान हो न जाये
दोनों तरफ़ की फ़ौजें होने लगीं इकट्ठा
सरहद पे आज फिर से घमसान हो न जाये
आये न मौत मुझको,यारब यही दुआ है
जब तक कि आख़िरत का सामान हो न जाये
पढ़ते हैं छन्द मेरे,कहते हैं भाई 'सौरभ'
इस दौर का "समर"भी रस खान हो न जाये
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फ़ुक़दान-- कमी
उन्वान--शीर्षक
अदू--दुश्मन
घमसान--लड़ाई,जंग
आख़िरत--ज़िन्दगी में नेक काम करना
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समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित
Comment
वाह सर,
हमेशा की तरह शानदार..
बधाई
बेहद उम्दा ग़ज़ल हुई है जनाब,
दिली मुबारकबाद
वाह आदरणीय बेहतरीन ग़ज़ल पढ़ने को मिली..सभी शेर एक से बढ़कर एक..आखरी तो लाजबाब है..
बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, जनाब समर साहब।
बधाई आपको।
सादर।
सब से पहले ... आप को वापस देख कर जो खुशी हुई है... भगवान का शुक्र है... समर जी, आपकी सेहत अच्छी रहे।
अब आपकी इस शानदार गज़ल पर दिल से बधाई।
//आये न मौत मुझको,यारब यही दुआ है
जब तक कि आख़िरत का सामान हो न जाये// ... वाह, वाह!
शेर दर शेर मुबारकबाद, समर भाई।
नफ़रत का आज कंकर जो तेरी आँख में है
इक रोज़ बढ़ते बढ़ते चट्टान हो न जाये
मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है
तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये जनाब समर साहब खूबसूरत गजल के लिए मुबारकबाद.....
अल्लाह आपको सेहतमंद रखे और हम लोग आपसे ताउम्र सीखते रहे ....
मज़लूम की कहानी सुनकर तू हँस रहा है
तेरा भी हाल ऐसा नादान हो न जाये वाह! वाह!! बहुत ही सच्चा शे'र कहा ।औरों पर या मज़बूर हँसने वाले एक दिन ख़ुद ग़म के शिकार हो सकते हैं
शे'र दर शे'र दिद के साथ मुबारकबाद आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब ।
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