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ग़ज़ल- सारथी || ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको ||

ख़बर तो कागज़ों की कश्तियाँ दे जाएँगी मुझको
ये लहरें ही तुम्हारी चिठ्ठियाँ दे जाएँगी मुझको
लिखे थे जो दरख्तों पर अभी तक नाम हैं कायम 

ख़बर ये भी कभी पुरवाईयाँ दे जाएँगी मुझको
कभी तो बात मेरी मान जाया कर दिले-नादां

तेरी नादानियाँ दुश्वारियाँ दे जाएँगी मुझको
बिछुड़ जाने का डर मुझको नहीं डर है तो ये डर है 

न जाने क्या न क्या रुस्वाईयां दे जाएँगी मुझको
तुम्हीं को भूल जाऊं मैं अजी ये हो नहीं सकता 

तुम्हारी यादें आकर हिचकियाँ दे जाएँगी मुझको

................................................................
सर्वथा मौलिक व अप्रकाशित

अरकान: १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ 

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Comment by vijay nikore on March 12, 2018 at 2:00pm

बहुत ही उम्दा गज़ल। बधाई।

Comment by surender insan on March 11, 2018 at 4:53pm

वाह ग़ज़ल का बहुत अच्छा प्रयास है ।हार्दिक बधाई स्वीकार करे जी।

Comment by Saarthi Baidyanath on March 9, 2018 at 11:06am

आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी, बहुत बहुत धन्यवाद ! सादर नमन !

Comment by Saarthi Baidyanath on March 9, 2018 at 11:05am

श्री  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी 
सादर प्रणाम स्वीकार करें ! स्नेह है !

Comment by Saarthi Baidyanath on March 9, 2018 at 11:03am

जनाब  Mohammed Arif साहिब, दिली शुक्रगुजार हूँ ! आपकी मुहब्बतें  हैं ! आदाब !

Comment by Saarthi Baidyanath on March 9, 2018 at 11:01am

आदरणीय Nilesh Shevgaonkar जी, हृदयतल से आभार ! सादर प्रणाम व् धन्यवाद !

Comment by Saarthi Baidyanath on March 9, 2018 at 11:00am

मोहतरम Samar kabeer साहिब, तहे-दिल से शुक्रिया ! नवाज़िश ! सादर प्रणाम सहित !

Comment by Samar kabeer on March 8, 2018 at 10:18pm

जनाब सारथी जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on March 8, 2018 at 9:17pm

शानदार बैद्यनाथ सारती भाई...
बड़ी रदीफ़ पर बहुत ख़ूब ग़ज़ल के लिए बधाई 

Comment by Mohammed Arif on March 8, 2018 at 9:07pm

आदरणीय बैद्यनाथ जी आदाब,

                        बहुत ही उम्दा ग़ज़ल । शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए । बाक़ी गुणीजन अपनी राय देंगे ।

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