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विश्व कविता दिवस पर एक कविता मंच को समर्पित

विश्व कविता दिवस पर महाभारत युद्धकाल में भगवान के वचनों को अपने शब्दों में पिरोने की कोशिश

​​रे रे पार्थ ये क्या करते हो?
धनु धरा पर क्यों धरते हो?
ओ शूरवीर मत हो अधीर
नैनों में क्यों भरते हो नीर
जीवन तो आना जाना है
चिरकाल किसे रह जाना है
मन में यूँ न मोह धरो
गांडीव उठाओ कर्म करो
मृत्यु बंन्धन से मुक्ति है
किस बात की आसक्ति है
धर्म विमुख हो पाप न कर
रक्षा कर संताप न कर
हे धनंजय हे महारथी
मत भूलो 'मैं' तेरा सारथी
पृत्यंचा खींच ललकार करो
चढ़ नंदिघोष प्रहार करो
धर्म की जब विजय होगी
हे अर्जुन तेरी जय-जय होगी
कायरता को वरण करते हो
रे रे पार्थ ये क्या करते हो?
(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 860

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 23, 2018 at 5:07pm

आदरणीय आरिफ जी हार्दिक आभार

Comment by Mohammed Arif on March 22, 2018 at 4:44pm

आदरणीय बृजेश कुमार जी आदाब,

                      कविता दिवस पर पेश बहुत ही बेहतरीन कविता । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 22, 2018 at 4:11pm

स्वागत है आदरणीय सुरेन्द्र जी..सादर अभिवादन स्वीकार करें..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 22, 2018 at 4:10pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय समर कबीर जी..स्नेह बनाये रखें..सादर

Comment by नाथ सोनांचली on March 22, 2018 at 2:58pm

आद0 बृजेश कुमार बज्र जी सादर अभिवादन। कविता दिवस पर अच्छी प्रस्तुति। बहुत बहुत बधाई आपको। सादर

Comment by Samar kabeer on March 22, 2018 at 12:07pm

जनाब बृजेश जी आदाब,कविता दिवस पर अच्छी प्रस्तुति,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 22, 2018 at 8:59am

नमन संग आभार स्वीकार करें आदरणीया कल्पना जी..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 22, 2018 at 8:58am

आदरणीय तस्दीक़ जी आपके शब्द ह्रदय में संजोने लायक हैं..इस ज़र्रानवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 22, 2018 at 8:57am

बहुत बहुत आभार आदरणीय धामी जी..

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on March 21, 2018 at 10:29pm

सुंदर सन्देश प्रद कविता हुई है | हार्दिक बधाई आदरणीय|

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