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अधूरा रिश्ता (लघुकथा)

वार्ड के बिस्तर पर वह निढ़ाल पड़ा है, डॉक्टर कह रहे हैं कि ये नीला पड़ गया है, उन्होंने पुलिस को भी बुला लिया है |
“नीला तो पैदा होते समय ही था, अब क्या होगा ?”, किसी पास खड़े ने कहा | 
बात निकलती हुई इस पर आ कर रुक गई, सुबह तो नए कपड़े पहन और चौर बाज़ार से खरीदी काली एनक लगा कि गया था 
काले चश्में का एक फायदा तो ये था कि आंख का टीर भी नजर नही आता था |
अभी कुछ दिन हुए घर वाली रब को प्यारी हो गई थी | 
कुछ दिनों से लोग इस के घर अफ़सोस करने आ रहे थे|
मगर ऐसा हो जायेगा किसी को यकीन ही नहीं आ रहा था , ये कैसे हो गया ?
साथ आये लोग दो चिती में हैरान परेशान थे|
तभी दो लोग पोलिस के साथ वार्ड में दाखल हुए , उनमें से इक कह रहा था “साला छोटी का रिश्ता लेने गया था, अभी दिन भी क्या हुए थे? 
खुद ही शर्म करनी चाहिए थी रिश्ता मांगने से |
ये तो साली आधी घर वाली को पूरी घर वाली बनानी चाहता था | सरकारी नौकरी के बल पे | 
वो तो नहीं बन कर आई मगर अब वहां जा रहा है , यहां से वापस नहीं आएगा |
पोलिस रिपोर्ट तैयार क्ऱ रही थी और पास खड़े लोग बाहर को जाने लगे |

"मौलिक व अप्रकाशित"

      

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Comment by babitagupta on May 14, 2018 at 6:04pm

अच्छी रचना प्रस्तुति के लिए आदरणीय सर जी बधाई स्वीकार कीजिए

Comment by Chetan Prakash on May 10, 2018 at 4:18pm

अंत लघु कथा के कथ्य को कदाचित भटकाता लगा।ऐसा लगा कथाकार एक सा थ कई लक्ष्यों को भेदना चाहता है।"ये तो साली आधी घर वाली को पूरी घर वाली  बनानी चाहता था | सरकारी नौकरी थी |  
वो तो नहीं बनी मगर अब  वहां जा रहा है , यहां से वापस नहीं आएगा  |
पोलिस रिपोर्ट तैयार क्ऱ रही थी और पास खड़े लोग बाहर को चल पड़े |"

Comment by Neelam Upadhyaya on May 8, 2018 at 3:51pm

अच्छी लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें आदरणीय मोहन बेगोवाल जी ।

Comment by Samar kabeer on May 5, 2018 at 4:08pm

जनाब मोहन बेगोवाल जी आदाब,अच्छी लघुकथा है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohan Begowal on May 5, 2018 at 1:56pm

वार्ड के बिस्तर पर वह निढ़ाल पड़ा है, डॉक्टर कह रहे हैं कि ये नीला पड़ गया है, उन्होंने पुलिस को भी बुला लिया है |
“नीला तो पैदा होते समय ही था, अब क्या होगा ?”, किसी पास खड़े ने कहा |
बात निकलती हुई इस पर आ कर रुक गई, सुबह तो नए कपड़े पहन और चौर बाज़ार से खरीदी काली एनक लगा कि गया था
काले चश्में का एक फायदा तो ये था कि आंख का टीर भी नजर नही आता था |
अभी कुछ दिन हुए घर वाली रब को प्यारी हो गई थी |
कुछ दिनों से लोग इस के घर अफ़सोस करने आ रहे थे|
मगर ऐसा हो जायेगा किसी को यकीन ही नहीं आ रहा था , ये कैसे हो गया ?
साथ आये लोग दो चिती में हैरान परेशान थे|
तभी दो लोग पोलिस के साथ वार्ड में दाखल हुए , उनमें से इक कह रहा था “साला छोटी का रिश्ता लेने गया था, अभी दिन भी क्या हुए थे?
खुद ही शर्म करनी चाहिए थी रिश्ता मांगने से |
ये तो साली आधी घर वाली को पूरी घर वाली बनानी चाहता था | सरकारी नौकरी के बल पे |
वो तो नहीं बन कर आई मगर अब वहां जा रहा है , यहां से वापस नहीं आएगा |
पोलिस रिपोर्ट तैयार क्ऱ रही थी और पास खड़े लोग बाहर को जाने लगे |

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